- सीएचसी बर्डपुर में तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
बर्डपुर। नवजात शिशुओं के प्रति सामाजिक व्यवहार में बदलाव से संबंधित तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन सीएचसी बर्डपुर में हुआ। लोगों से कहा गया कि प्रशिक्षण के बाद वे अपने-अपने स्वास्थ्य केंद्रों में सुधार लाएं।
सीएचसी अधीक्षक डा. सुबोध चंद्र ने यूनिसेफ की ओर से नवजात शिशु उत्तरजीविता परियोजना को लेकर सामाजिक व्यवहार में बदलाव से संबंधित जानकारी दी। उन्होंने कहा इसमें यूनिसेफ सहित कई अन्य सहयोगी संस्थाओं का अहम योगदान रहा है। संस्थागत प्रसव के साथ ही नवजात शिशुओं के विकास को लेकर सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग सार्थक प्रयास कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग, आईसीडीएस के साथ ही जीविका का भी सहयोग मिल रहा है। प्रशिक्षण में संवेदनशील होकर अनुभव लेने की जरूरत है। प्रशिक्षित होने के बाद अपने-अपने स्वास्थ्य केंद्रों में सुधार करना होगा। प्रशिक्षक डा डीके राय ने कहा कि नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए उचित देखभाल आवश्यक है। प्रभावी उपायों के तहत मातृ एवं नवजात शिशु देखभाल करना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। मुख्य रूप से गर्भावस्था के दौरान समुचित देखभाल, प्रसव के दौरान एवं प्रसव के तुरंत बाद माता एवं नवजात शिशु की देखभाल आवश्यक है। इसके लिए टेटनेस टाक्साइड के टीके, एनीमिया और रक्तचाप का प्रबंधन, मातृत्व संक्रमण, सिफलिस, मलेरिया, मातृत्व पोषण के साथ ही नवजात शिशुओं के जन्म की तैयारी करनी होती है। परिवार नियोजन, केवल स्तनपान कराने, हाथ धोने और शिशुओं की देखभाल से संबंधित महत्वपूर्ण बातों को बार-बार प्रोत्साहित करना होगा। आशा कार्यकर्ताओं द्वारा नवजात शिशुओं वाले घर डोर टू डोर भ्रमण कर शिशु की देखभाल की जाती है। मूल्यांकन के आधार पर एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तुलना में आशा कार्यकर्ताओं द्वारा नवजात शिशुओं एवं माताओं के पास पहुंचने की संभावनाएं बहुत अधिक रहती है। इस दौरान नीरज सिंह, शर्मिला शुक्ला, ललिता शुक्ला, नर्गिस जहां, चंदा गुप्ता, सोनमती, माया गुप्ता, नीतू विश्वकर्मा, पुष्पा देवी, किरन और कुसुम उपस्थित थीं।