समाज में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने में युवा वर्ग महत्वपूर्ण भूमिका का योगदान दे सकता है। इसी उद्देश्य से 1969 में राष्ट्रीय सेवा योजना की स्थापना डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णनन ने कालेजों में शुरू की थी। जो आज देश के सभी महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों में लागू हो गया है।
इसका मुख्य उद्देश्य युवा वर्ग को तराश कर समाज में नागरिकों को जागरुक करने के साथ-साथ समाज सेवा का भाव पैदा कराना है। यह बातें शिवपति स्नातकोत्तर महाविद्यालयों के सभागार में मंगलवार को एनएसएस के सात दिवसीय विशेष शिविर के उद्घाटन में बतौर मुख्य अतिथि प्राचार्य डॉ. आरपी सिंह ने कही।उन्होंने कहा कि एकता व अखंडता हमारे देश की मिसाल है। इसको बनाए रखने में युवा वर्ग अपनी जिम्मेदारी का योगदान देकर संजोए रखें।
विशिष्ट अतिथि उप प्राचार्य एपी चंद ने कहा कि अनुशासन ही हमारे कॉलेज का गौरव है। सात दिवसीय विशेष शिविर में विद्यार्थी अनुशासित होकर समाज में अपनी पहचान को बताएं। एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुशील कुमार ने कहा कि सात दिवसीय विशेष शिविर में 50 शिविरार्थी प्रतिभाग कर रहे हैं।
इस बार ग्राम सभा गड़ाकुल को गोद लिया गया है। इसमें प्रत्येक दिन स्वच्छता जागरुकता, पर्यावरण जागरुकता, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि कार्यक्रम का आयोजन होगा। अच्छा कार्य करने वाले एनएसएस के सेवक को बेस्ट सेवक एवार्ड दिया जाएगा।
कार्यक्रम में पूर्व एनएसएस अधिकारी डॉ. एके श्रीवास्तव ने जाति-जाति, जाति है, रविदास कहे जाति न जाई दे जात। उन्होंने कहा कि समाज में फैले जाति-पाति के भेदभाव को समाप्त करने का काम भी एनएसएस के सेवको को करना होगा। तभी जाकर समाज में एकता का भाव जागृत होगा।
इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प और दीप प्रज्जवलित कर किया। छात्रा अंकिता त्रिपाठी व सरस्वती पांडेय ने बैज लगाकर व सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत से मंचासीन अतिथियों का अभिवादन किया।
इस दौरान डॉ उमेश पांडेय, लेफ्टिनेंट मुकेश कुमार, रत्नेश सोनी, पंकज सिंह, अश्वनी सिंह, स्वाती त्रिपाठी, संजू यादव, नीलम पांडेय, आशा उपाध्याय, श्रेया, आफरीन नुजहत, नित्या सिंह, यशस्वी गुप्ता, अर्पिता निगम, सुनीता यादव, संजय कुमार आदि मौजूद रहे।