कांशीराम आवासीय कॉलोनी का हाल बेहाल।
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सिद्धार्थनगर। सरकार के बदलते ही सब कुछ बदल गया। कांशीराम आवासीय कॉलोनी की ओर किसी ने मुंह नहीं फेरा। बसपा सरकार की प्राथमिकता में रही यह कॉलोनी पांच वर्षों तक उपेक्षित ही रही। नतीजा यहां आवास क्षतिग्रस्त हो गए। पेयजल समस्या गंभीर रूप में पहुंच गई है। साफ-सफाई नदारद है। बुनियादी जरूरतों के लिए कॉलोनीवासी छटपटा रहे हैं। कोई भी इनको समस्या से निजात दिलाने वाला नहीं है।
नगर की सीमा पर वर्ष 2010 में बसपा सरकार ने गरीबों के लिए कांशीराम आवासीय कॉलोनी स्थापित की थी। दो वर्ष तक तो सब कुछ ठीक-ठाक रहा, लेकिन 2012 में सरकार के बदलते ही बदल गया। आज आवास का आलम यह है कि वहां जाने के बाद लोगों को नाक बंद करना पड़ता है। कारण जलनिकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से गंदा पानी घर के सामने सड़ रहा है। विकास रस्तोगी व अरुण श्रीवास्तव का कहना है कि आवास आवंटित करने के बाद यहां पर कुछ ध्यान नहीं दिया गया है। यहां तक कि घरों से पानी निकलने तक की व्यवस्था नहीं है। आवास नीचा होने के कारण बरसात में पानी घरों में घुस जाता है, लेकिन समस्या पर ध्यान देने वाला कोई नहीं है। अजीम व इंद्रजीत रस्तोगी कहते हैं कि यहां समस्याओं का अंबार है। यहां की सबसे बड़ी समस्या शुद्ध पेयजल की है।
सप्लाई में आने वाला पानी बदबू करता है जिसे पीने पर संक्रामक बीमारी फैलने का भय बना हुआ है, लेकिन मजबूरन लोगों उसी पानी का सेवन करना पड़ा है क्योंकि दूसरा और कोई साधन नहीं है। जिस टैंक से पानी की सप्लाई की जाती है उसका पाइप फूट गया है। जिससे गंद पानी भी उसी के रास्ते आ रहा है। विद्या देवी व राजू का कहना है कि सफाई कर्मी तो चार नियुक्त किए गए हैं, लेकिन वह केवल एक सड़क पर झाडू लगाकर चले जाते हैं नाली कभी सफाई नहीं करते हैं। जिस कारण नालियां गंदगी से भरी हुई हैं। इसके अलावा पानी की भी दिक्कत है आवास में 12 हैंडपंप लगे थे आज सभी खराब हैं।
एक हैंडपंप ठीक हुआ था जिस पर पानी लेने के लिए सैकड़ों की भीड़ जुट जाती है। समस्या को लेकर कोई भी गंभीर नहीं हैं। इस संबंध में नगर पालिका के ईओ राजीव रंजन का कहना था कि नगर पालिका का दायित्व सिर्फ साफ-सफाई का है, जो नियमित होता है। अन्य सुविधाओं के लिए संबंधित विभाग जिम्मेदार है। कॉलोनी में गंदगी फैले रहने के जिक्र पर कहा कि सफाई में कोई लापरवाही हो रही है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।