पुलिस लाइन सभागार में हुई कार्यशाला में मौजूद पुलिसकर्मी।
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सिद्धार्थगनगर। तेजी से बढ़ते अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस अब हाईटेक हो रही है। घटना के तत्काल बाद मौके पर पहुंचने के लिए जीआईएस (जियोग्राफिकल इंफार्मेशन सिस्टम) एप का सहारा लिया जाएगा। इस एप के जरिए पुलिस कंट्रोल रूम के 100 नंबर को जोड़ा जा रहा है। 102 एंबुलेंस सेवा की तर्ज पर 100 नंबर डॉयल करते ही जीपीएस मैपिंग के जरिए लोकेशन जानकर तत्काल पुलिस को मौके पर भेजने में मदद मिलेगी। इसे लागू करने के लिए रविवार को पुलिस कमियों को प्रशिक्षण दिया गया। एप की कार्यविधि समझाते हुए इससे जुड़ने के निर्देश दिए गए।
पुलिस लाइन सभागार में आयोजित कार्यशाला में सीओ सदर अकमल खां ने सभी थाने से आए लगभग 90 कांस्टेबलों को जीआईएस मैपिंग एप को चलाने के बारे में प्रोजेक्टर के माध्यम से बिंदुवार समझाया। पुलिस कर्मियों से एक-एक करके सवाल भी किए।
सीओ मोहम्मद अकमल खां ने बताया कि मुख्यमंत्री की पहल के बाद कंट्रोल रूम के 100 नंबर को डिजिटल बनाया जा रहा है। जीआईएस मैपिंग एप के माध्यम से जिले के सभी थाना क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के अपराध, समय, प्रकार व उसकी जानकारी इस पर अपलोड की जाएगी। किसी स्थान पर किस प्रकार की सबसे अधिक घटना होती है, वह एप में लोड किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 100 नंबर डायल करते ही 102 एंबुलेंस की तरह से कॉल सीधे लखनऊ मुख्यालय पहुंचेगी।
उसके बाद संबंधित थाने व वहां से संबंधित सिपाही को मौके पर भेजा जाएगा। पुलिस के तत्काल मौके पर पहुंचने से अपराध नियंत्रण में सहूलियत रहेगी। उन्होंने कहा कि यह मैपिंग एप योजना इस लिए चलाई जा रही है, जिससे कोई कार्य में लापवाही न बरतने पाए। लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि कई बार ऐसा भी होता है कि सूचना मिलने के बाद भी संबंधित थाने के सिपाही के पुलिसकर्मी हीलाहवाली करते हैं।
इस एप के जरिए ऐसा करने वाले पकड़ में आ जाएंगे। इसमें सभी प्रकार की क्राइम की तीन वर्षों तक की डाटा फीड रहेगा। इस दौरान प्रशक्षिक एसपी पीआरओ विनय कुमार मिश्र, अतुल कुमार पाठक, जितेन्द्र पांडेय और राकेश कन्नौजिया आदि मौजूद रहे।