जीजीआईसी: इमारत के साथ शिक्षा व्यवस्था भी जर्जर
जिला मुख्यालय स्थित राजकीय कन्या इंटर कॉलेज का हाल
आधारभूत शिक्षण उपकरणों की कमी, बालिकाओं की रुचि नहीं
कभी एक हजार छात्राएं पढ़ती थीं, अब संख्या 200 से भी कम
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। नारे, स्लोगन के साथ मिशन शक्ति समेत विविध कार्यक्रमों के जरिए बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने का जोर दिया जा रहा है, पर जिला मुख्यालय स्थित राजकीय कन्या इंटर कॉलेज की बदहाली दूर करने का कोई उपाय नहीं हो रहा है। यहां भवन के साथ ही शिक्षा व्यवस्था भी जर्जर हो चुकी है। कभी एक हजार छात्राओं से गुलजार रहने वाले विद्यालय में अब मुश्किल से 200 छात्राएं ही रह गई हैं।
मुख्यालय का राजकीय कन्या इंटर कॉलेज एक दशक पूर्व छात्राओं से गुलजार रहता था। यहां शहर ही नहीं दस किलोमीटर दूर तक के गांवों की छात्राएं पढ़ने आती थीं। स्कूलों बसों के जरिए लगभग एक हजार छात्राएं पढ़ने पहुंची थीं। नामांकन के लिए कतारें लगी रहती थी। कक्षाएं भी नाममात्र की छात्राओं के बीच गतिविधियां संचालित करने को मजबूर हैं। वर्ष 1995 के बाद से यहां किसी स्थायी प्रधानाचार्य की नियुक्ति नहीं हुई। कार्यवाहक से ही काम चलाया जा रहा है। शिक्षकों की भी कमी है। एलटी के 13 स्वीकृत पद के सापेक्ष सिर्फ पांच ही कार्यरत हैं। प्रवक्ता के सभी सात पद खाली हैं। रिक्त पदों पर सेवानिवृत्त शिक्षकों से मानदेय के आधार पर शैक्षणिक कार्य लिया जा रहा है। लिहाजा हिंदी, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, नागरिकशास्त्र, संस्कृत, संगीत और गृह विज्ञान जैसे विषयों की पढ़ाई भगवान भरोसे ही हो रही है। यहां विज्ञान प्रयोगशाला की मान्यता भी नहीं है। इस बाबत प्रभारी जिला विद्यालय निरीक्षक डीके श्रीवास्तव ने कहा कि अभी हाल में जीजीआईसी तेतरी बाजार का सीडीओ की ओर सघन निरीक्षण किया गया था। शिक्षकों के पदों को भरने समेत अन्य संसाधनों को पूर्ण कराने के लिए शासन स्तर पर लिखा-पढ़ी करने के लिए निर्देशित किया गया है, जल्द ही पत्र भेजा जाएगा।
संसाधन भी पर्याप्त नहीं
विद्यालय की तीन तरफ से बाउंड्रीवाल गिर गई है, जिससे परिसर असुरक्षित है। परिसर में बना कंप्यूटर लैब भी शोपीस है। प्रोजेक्टर, कंप्यूटर और अन्य उपकरण प्रयोग नहीं किए जा रहे हैं। कॉलेज परिसर में पिछड़े वर्ग की छात्राओं के लिए छात्रावास वर्ष 2012 में निर्मित हुआ, पर एक भी छात्राओं के कदम नहीं पड़ सके हैं।