फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महंगाई की हवा से बुझ रहे गैस चूल्हे

विज्ञापन
विज्ञापन
महंगाई की हवा से बुझ रहे गैस चूल्हे
विज्ञापन

लकड़ी के चूल्हा पर भोजन बनाने को मजबूर हुईं महिलाएं
कोरोना काल में गैस छोड़कर अपना लिया लकड़ी वाला चूल्हा
मनोज शुक्ल
मन्नीजोत। रसोई गैस की बढ़ती कीमतों के कारण महिलाएं लकड़ी का चूल्हा जलाने के लिए मजबूर हो रही हैं। घरों में सिलिंडर रखे हुए हैं और गांवों की महिलाएं रसोई के लिए लकड़ी, उपले का इंतजाम कर रही हैं।
जब उज्ज्वला योजना शुरू हुई थी, तब घरेलू गैस सिलिंडर की कीमत 550 रुपये थी और लगभग 200 से 250 सब्सिडी आती थी। अब रसोई गैस सिलिंडर की कीमत 909 रुपये है और सब्सिडी 62 रुपये मिल रही है। ऐसी स्थिति में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को गैस बुक कराने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना संक्रमण के दौर में लोगों की रोजी रोटी प्रभावित हुई तो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं ने लकड़ी के चूल्हा पर खाना बनाना मुनासिब समझा। जिले में भारत पेट्रोलियम के 16281, हिंदुस्तान पेट्रोलियम 77830 इंडेन के 71683 सहित कुल 1.65 लाख उज्ज्वला योजना के लाभार्थी हैं। केंद्र सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत नि:शुल्क गैस कनेक्शन के तहत सिलिंडर और चूल्हा दिया था लेकिन एलपीजी गैस की बढ़ती कीमतों से लोग सिलिंडर को रिफिल करने से कतरा रहे हैं। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

क्या कह रहे हैं लाभार्थी
भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के सेमरा बनकसिया गांव निवासी उर्मिला ने कहा कि जब सरकार ने गैसों सिलिंडर दिया था, उस समय गैसों की कम कीमत थी तो मेहनत मजदूरी कर गैस का रिफिल करवा देते थे। करीब छह माह से चूल्हे पर लकड़ी से खाना पका रही हूं। डिवलीडीहा मिश्र गांव निवासी सुनरपाती का कहना है कि वे रोज कमाने-खाने वाले लोग हैं। रसोई गैस सिलिंडर का मूल्य बढ़ गया है, जिसे वे लोग रीफिल नहीं करा सकते। इससे अच्छा है कि चूल्हे पर ही खाना पका लें। डिवलीडीहा मिश्र गांव निवासी झिनका देवी ने कहा कि महंगाई के कारण वे गैस की रिफलिंग नहीं करा पा रही हैं। इसलिए चूल्हे पर खाना पका रही हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें