सिद्धार्थनगर। एलपीजी की कमी और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार इजाफे के बीच एक मई को कॉमर्शियल गैस सिलिंडर में हुई 993 रुपये की भारी बढ़ोतरी के बाद जिले में संकट और गहरा गया है। पहले से बढ़ी कीमतों और लागत से जूझ रहे कारोबारियों के सामने करीब एक हजार रुपये की बढ़ोतरी से नया संकट आ गया है। हालात यह है कि मांग के मुकाबले सिर्फ करीब 20 फीसदी सिलिंडर की उपलब्धता से प्रभावित खाद्य कारोबार पर इस वृद्धि का असर पड़ेगा, जिसकी आंच लोगों की जेब तक भी पहुंच सकती है। 19 किलो के कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत एक जनवरी से एक मई के बीच पांच बार में 1468.50 रुपये तक बढ़ोतरी की जा चुकी है।
जिले के सभी 51 एजेंसियों पर कुल 5,89,351 घरेलू गैस के उपभोक्ता हैं। वहीं, कॉमर्शियल गैस लेने वाले रेस्टोरेंट, होटल आदि के भी करीब एक हजार कनेक्शन है। जिले के नौगढ़, बांसी, डुमरियागंज, शोहरतगढ़ जैसे प्रमुख बाजारों में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। स्थानीय स्तर पर गैस की अनियमित आपूर्ति के कारण पिछले एक महीने में दर्जनों छोटे होटल और ढाबे बंद हो चुके हैं। कई संचालक रोजाना सिलिंडर की उपलब्धता के आधार पर ही दुकान खोलने या बंद रखने को मजबूर हैं। गैस डिस्ट्रीब्यूटरों के अनुसार, उन्हें ऊपर से सीमित आवंटन मिल रहा है, जिससे नियमित सप्लाई देना संभव नहीं हो पा रहा।
जो होटल और रेस्टोरेंट किसी तरह खुले हैं, वहां भी संचालन सामान्य नहीं है। गैस की कमी के कारण मेन्यू को काफी सीमित करना पड़ा है और कई जगह केवल बेसिक भोजन ही उपलब्ध कराया जा रहा है। लागत बढ़ने के कारण कीमतों में भी तेजी आई है। सामान्य थाली 80 रुपये से बढ़कर 110-120 रुपये तक पहुंच गई है, जबकि चाय और नाश्ते की कीमतों में भी 30 से 50 फीसदी तक इजाफा हुआ है।
जिन रेस्टोरेंट में पहले दिनभर कड़ाही चढ़ी रहती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है। शहर के कुछ बड़े होटल और ढाबे, जहां कोयले की भट्ठी जलाने की गुंजाइश है, वे किसी तरह आधे-अधूरे तरीके से चल रहे हैं। यहां मेन्यू सीमित कर दिया गया है। तली-भुनी चीजें कम हो गई हैं और ग्राहक भी गिने-चुने नजर आते हैं। वहीं, घनी बस्तियों में स्थित छोटे ढाबों और होटलों की हालत और खराब है। होटल फिरंगी, बीएसए कार्यालय के सामने, सनई चौराहे के कई होटल बंद हैं। चाइनीज फास्ट फूड की कई दुकानें चलाने वाले चंद्र प्रकाश कहते हैं कि वह तीन कॉमर्शियल सिलिंडर इस्तेमाल करते थे। अब एक भी नहीं मिल रहा है, जिसके कारण दुकान बंद करनी पड़ी।
जानकार बताते हैं कि इस संकट का असर अब सीधे आम लोगों पर दिख रहा है। दिहाड़ी मजदूर, छोटे कर्मचारी और छात्र, जो सस्ते होटल-ढाबों पर निर्भर रहते थे, उनके लिए भोजन का खर्च अचानक बढ़ गया है। कई स्थानों पर सस्ती थाली लगभग खत्म होती जा रही है। शहर में पीजी और किराए पर रहने वाले छात्रों की स्थिति और गंभीर है। गैस की कमी के कारण कई मेस अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं, जबकि कुछ संचालक सीमित भोजन के साथ काम चला रहे हैं। लगातार बढ़ती लागत के चलते फीस बढ़ाने की तैयारी भी की जा रही है, जिससे छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ना तय है।
नौगढ़ में कई जगह चल रही टिफिन सर्विस और घरेलू महिला उद्यमियों का काम भी प्रभावित हुआ है। गैस की अनिश्चित उपलब्धता के कारण ऑर्डर समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं, जिससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ रहा है। वहीं, होटल-ढाबों के बंद होने से वहां काम करने वाले कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह स्थिति डबल इन्फ्लेशनरी शॉक का उदाहरण है, जहां एक तरफ लागत बढ़ रही है और दूसरी तरफ सप्लाई घट रही है। इससे स्थानीय स्तर पर महंगाई और बेरोजगारी दोनों पर दबाव बढ़ता है।
कॉमर्शियल एलपीजी का आवंटन कम होने से जिले में सप्लाई प्रभावित हुई है। मांग के अनुरूप आपूर्ति बढ़ाने के लिए उच्च स्तर पर अनुरोध भेजा गया है। जल्द अतिरिक्त आवंटन मिलने पर स्थिति सामान्य करने का प्रयास किया जाएगा।
- देवेंद्र प्रताप सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी