जिला स्टेडियम में नहीं हैं खेलों के संसाधन।
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सिद्धार्थनगर। व्यक्तित्व के विकास में खेल का अहम रोल है, लेकिन जिले में खेल का ही विकास नहीं हो पा रहा। प्रतिभाएं दम तोड़ रही है। जिला स्टेडियम में भी खेलकूद के माकूल इंतजाम नहीं है। न तो संसाधन हैं और न ही प्रशिक्षक। चुनिंदा खेलों के साथ ही खेल के विकास के दावे हो रहे हैं। खेलों के पिछड़ेपन की यह स्थिति तब है, जब जिले से खेल मंत्री रह चुके हैं। सुविधाओं के अभाव की कसक खेल प्रेमियों को साल रही है। खेलों के उत्थान और विकास का यह मुद्दा इस बार चुनाव में उछालने को वह बेताब हैं।
25 लाख की आबादी वाले जिले में खिलाड़ियों के जिला स्टेडियम के अलावा शोहरतगढ़ में एक ग्रामीण स्टेडियम मौजूद है। स्टेडियम का ढांचा तो खड़ा है, लेकिन संसाधन उपलब्ध नहीं है। जिला स्टेडियम पर ही गौर करें तो यहां ताइक्वांडो, क्रिकेट और एथलेटिक्स के कोच ने हाल में ही जिम्मेदारी संभाली है। उप क्रीड़ाधिकारी खुद हैंडबाल की कोच हैं। इनके अलावा अन्य किसी खेल के कोच नदारद हैं। कोच नहीं है, लिहाजा संसाधन भी नहीं मिलता। अफसरों की दलील रहती है कि बजट का अभाव है। दरअसल, राजनीतिक स्तर पर मजबूत पैरवी न होने से खेलों को यहां पूरी तरह उपेक्षित छोड़ दिया है।
शोहतरगढ़ के पूर्व विधायक स्व.दिनेश ने खेल मंत्री रहते हुए यहां स्वीमिंग पूल का प्रस्ताव मंजूर कराया था। करीब छह करोड़ की लागत से यह पूल 10 वर्षों में बनकर तैयार हुआ है। दिसंबर माह में इसका आनन-फानन में लोकार्पण भी कर दिया गया, मगर पूरी तरह तैयार न होने से आमजन के लिए चालू नहीं हो पाया है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेल और खिलाडिय़ों की धमक के बाद जिले की ग्रामीण प्रतिभाएं खुद को कुंठित महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर यहां संसाधन मिलते तो वह भी अपनी प्रतिभा को निखारने की कोशिश करते, मगर सुविधा और प्रोत्साहन के अभाव में उनका हौसला टूट रहा है।