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Siddharthnagar News: तहसील की दौड़भाग से मुक्ति... अब क्रय केंद्र प्रभारी ही कर देंगे सत्यापन

Sat, 18 Apr 2026 01:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। किसानों के लिए अच्छी खबर है, अब उपज बेचने के लिए तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। तहसील से होने वाली सत्यापन प्रक्रिया को अब पूरी तरह से बंद कर दी गई है। उत्पाद बेचने के लिए अब केवल ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा।
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सत्यापन का काम क्रय केंद्र प्रभारी ही करेंगे। इसके लिए दो विकल्प है। अगर कृषि विभाग में एग्रो स्टैग अपडेट है तो पंजीकरण कराने के बाद वह खुद सत्यापन कर देगा। क्योंकि, किसान के खेत का पूरा ब्यौरा उसी में दर्ज है।
वहीं, अगर एग्रो स्टैग पंजीकरण नहीं है तो किसान का फार्मर रजिस्ट्री से सत्यापन हो जाएगा। वह भी संबंधित क्षेत्र के क्रय केंद्र प्रभारी करेंगे। पंजीकरण के बाद तहसील के चक्कर की झंझट से मुक्ति मिल जाएगी।
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सरकार किसानों को उपज का उचित मूल्य मिल सके, इसके लिए हर साल फसलों का समर्थन मूल्य तय करती है। उसी मूल्य पर सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों की फसल की तौल होती है और डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में धनराशि का भुगतान किया जाता है। पारदर्शिता के बीच सेंधमारी और किसानों की समस्याओं को देखते हुए सरकार की ओर से समय-समय पर नियम में बदलाव किया जाता है। खरीद में बिचौलियों का राज समाप्त करने और किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने के लिए सरकार ने ऑनलाइन व्यवस्था पर जोर दिया। खरीद में जहां ऑनलाइन पर फोकस किया गया।
वहीं, दूसरी ओर सत्यापन प्रक्रिया में अगल-अलग स्टेज तय किया गया, जहां एडीएम और एसडीएम स्तर पर उपज बिक्री करने वाले किसानों का ऑनलाइन सत्यापन किया जाना था। इसके बाद किसान अपनी उपज बेच सकते थे, लेकिन, इसके बाद भी खरीद में घोटाले के मामले सामने आए, जिसमें ऐसा भी पाया गया कि बिना रकबा और कम भूमि वाले किसानों की बड़ी तौल की गई, जिससे पूरी व्यवस्था पर सवाल उठा।
वहीं, किसानों को लाभ भी नहीं मिल पाया। रबी सीजन की खरीद शुरू होने के बाद शासन ने किसानों के हित को देखते हुए ऑनलाइन पंजीकरण के बाद किसानों की तहसील के जरिये होने वाली सत्यापन प्रक्रिया को पूरी तरह से बंद कर दिया।
अब सत्यापन की जिम्मेदारी क्रय केंद्र प्रभारी के जिम्मे हो गई। इसके साथ ही फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य कर दी गई। अगर फार्मर रजिस्ट्री हुई है और किसान ने ऑनलाइन पंजीकरण करवाया है तो क्रय केंद्र प्रभारी फार्मर रजिस्ट्री के जरिये सत्यापन कर देंगे। ऐसे में किसान उसी क्रय केंद्र पर बिक्री कर देंगे। वहीं, दूसरी सुविधा यह है कि अगर किसान का कृषि में एग्रो स्टैग बना हुआ है तो पंजीकरण के बाद स्वत: ऑनलाइन सत्यापित कर देगा। उसमें खसरा, खतौनी अपडेट है। उसी से ऑनलाइन रिपोर्ट लग जाएगा और बिक्री भी हो जाएगी।
रिपोर्ट लगवाने में होती है परेशानी : उपज बेचने के लिए विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण होने के बाद तहसील स्तर से रिपोर्ट लगाई जाती है। इसमें रिपोर्ट तो ऑनलाइन ही लगाती है, लेकिन इसके लिए किसानों को तहसील के चक्कर काटने पड़ते हैं। इसमें बिक्री के मात्रा के हिसाब से एडीएम, एसडीएम स्तर से सत्यापन होता था। ऐसे में कई दिन लग जाता था, जिससे किसानों को परेशानी होती थी। घोटाले भी सामने आए। इस व्यवस्था के लागू होने से संकट से निजात मिल जाएगी। वहीं, गड़बड़ी की गुंजाइश कम हो जाएगी।
जिले में बने हैं 67 क्रय केंद्र : जिले में 30 मार्च से गेहूं खरीद की प्रक्रिया शुरू हो गई है। खरीद के लिए जिले में विभिन्न संस्थाओं के कुल 67 क्रय केंद्र बनाएं गए हैं। इसमें ऑनलाइन पंजीकरण कराने वाले किसानों को ही बिक्री की अनुमति थी। इसी बीच शासन की ओर से बिक्री में फार्मर रजिस्ट्री को अनिवार्य कर दिया। अब जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हुई थी, वह उसे बनवाने में जुटे हैं।
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