असली और बड़े चेहरे जल्द होंगे बेनकाब
फर्जी शिक्षकों की जांच के लिए सीओ कैंट बीएसए कार्यालय पहुंचे
बीएसए से की पूछताछ, बताया कि चार गिरफ्तार आरोपियों की जमानत याचिका हुई है खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। फर्जी शिक्षकों की जांच कर रहे सीओ कैंट गोरखपुर सुमित शुक्ला शुक्रवार की देर शाम बीएसए कार्यालय जांच करने के लिए पहुंचे। बीएसए से मुलाकात कर फर्जी शिक्षकों से जुड़े दस्तावेज की जानकारी ली। सीओ ने बताया कि पुलिस ने फर्जी शिक्षक प्रकरण मामले में गिरफ्तार किए गए चार आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज करवाया है। पुलिस मामले में जल्द ही बड़े चेहरे को बेनकाब करेगी।
बता दें कि एसटीएफ की गोरखपुर इकाई ने फर्जी शैक्षिक दस्तावेज के सहारे नियुक्ति पाने और बर्खास्त शिक्षकों को बचाने के एवज में रिश्वत मांगने के आरोप में बीएसए के स्टेनो हरेंद्र सिंह निवासी कसदेवा, कुंवर थाना हरैया जिला बस्ती, शिक्षक सच्चिदानंद पांडेय निवासी अहिरौली जिला कुशीनगर, अवधेश मिश्रा निवासी मानेबला झुगिया बाजार चिलुआताल गोरखपुर (फर्जी तरीके से नियुक्त शिक्षिका के पति), चंद्रदेव पांडेय, निवासी जमुथा, थाना तरबगंज गोंडा और बाबू लाल चौधरी निवासी रतनपुर थाना गौरा चौराहा, जिला बलरामपुर को 23 सितंबर को गिरफ्तार किया था। मामले की जांच उस वक्त सीओ कैंट रहे बोत्रे प्रमोद रोहन प्रसाद को सौंपा गया था। जांच के क्रम में करीब जिले में 400 फर्जी शिक्षकों की बात सामने आई थी। इसके अलावा उन्होंने उस वक्त तत्कालीन बीएसए राम सिंह को 29 शिक्षकों की सूची सौंपी थी। इसमें केवल 16 शिक्षकों के प्रमाण पत्र भी फर्जी पाए गए थे। उसी दौरान शासन ने डीएम के पत्र पर बीएसए राम सिंह को निलंबित कर दिया।
दूसरी ओर, सीओ कैंट बोत्रे प्रमोद रोहन प्रसाद का स्थानांतरण भी हो गया। इसके बाद जांच लटक गई थी। लेकिन नए सीओ कैंट सुमित शुक्ला ने फिर से जांच शुरू कर दी है। बताया कि सच्चिदानंद पांडेय, अवधेश मिश्रा, चंद्रदेव पांडेय और बाबू लाल चौधरी की जमानत याचिका को पुलिस ने अपने स्तर से खारिज करवा दिया है। साथ ही मामले की जांच शुरू कर दी गई है। बीएसए डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी से फर्जी शिक्षकों के दस्तावेज मांगे गए हैं। करीब एक दर्जन से अधिक शिक्षकों की सूची भी सौंपी गई है।