-अभी तक नहीं खुल पाया बौद्ध केंद्र
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में छह साल पहले स्वीकृत हुआ अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र कागजों में ही चल रहा है, जबकि अभी तक परिसर में इसका कार्यालय भी नहीं खुल पाया है। विदेशी भाषा की पढ़ाई भी नहीं शुरू हो पाई है।
वर्ष 2015 में विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी। उसके तीन वर्ष बाद 2018 में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र की स्वीकृति प्राप्त हुई थी, लेकिन उसके बाद विश्वविद्यालय के जिम्मेदारों ने विज्ञापन निकाला, लेकिन शिक्षकों की नियुक्त नहीं हुई। इसके कारण विश्वविद्यालय में नौ विदेशी भाषाओं की पढ़ाई अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। विश्वविद्यालय में विदेशी भाषा के अंतर्गत नेपाली, कोरियाई, सिंघली, थाई, पाली, प्राकृत, अपभ्रंश सहित नौ भाषाओं की पढ़ाई होनी थी। जो अभी तक कागजों में ही संचालित हो रही हैं।
केंद्र का उद्देश्य है कि हिंदू, बौद्ध व जैन धर्म दर्शन में परास्नातक स्तर के पाठ्यक्रम के अंतर्गत विदेशी भाषाओं की पढ़ाई होगी, तो विदेशी छात्र-छात्राओं का रुझान बढ़ेगा, लेकिन इस केंद्र को अस्तित्व में आने में छह साल बीत गया है। अभी तक इसके लिए विश्वविद्यालय ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। विश्वविद्यालय नेपाल बाॅर्डर के समीप होने से यहां विदेशी छात्राें के आने की संभावना अधिक थी, लेकिन छात्रों को अपनी भाषा का विषय नहीं मिलने से यहां आना पसंद नहीं कर रहे हैं।
गौतम बुद्ध के बौद्ध दर्शन की भी नहीं शुरू हुई पढ़ाई
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु अहिंसा और शांति का संदेश देने वाले गौतम बुद्ध के बचपन के नाम पर रखा गया हैं। जिले में गौतम बुद्ध से जुड़ी कई चीजें मिलती रहती है, लेकिन छात्रों को पढ़ाने के लिए अभी तक गौतम बुद्ध के दर्शन को भी शुरू नहीं किया गया है। यदि इस के बारे में परिसर में पढ़ाया जाए तो लोगों को उनके बारे में जानने का मौका मिलेगा। लोग गौतम बुद्ध से जुड़ी चीजों के बारे में खोज कर पाएंगे।
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वर्जन
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र में शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरु की गई है। शिक्षक नियुक्त होने के बाद कक्षाओं का संचालन शुरू किया जाएगा।
-अमरेंद्र कुमार सिंह, कुलसचिव