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Siddharthnagar News: अब बाढ़ नहीं देगी गहरे जख्म... थमेगा संकट

Sun, 15 Feb 2026 01:30 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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जोगिया क्षेत्र के सगंलदीप गांव के पास राप्ती नदी का कटान स्थल। संवाद
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सिद्धार्थनगर। हर साल राप्ती के उफान के बाद चार माह तक बाढ़ की त्रासदी में घर, फसल गवां कर बांध पर रात काटने को विवश रहने वाले अमरिया गांव के संगलदीप के लोगों को इस बाढ़ गहरे जख्म नहीं देगी। बाढ़ की मार से इस बार काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
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शासन ने कटाव निरोधक कार्य के लिए 4.67 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इससे न सिर्फ राप्ती नदी के तट पर बसे अमरिया के संगलदीप के लोगों को राहत मिलेगी बल्कि क्षेत्र के कई गांवों और बड़ी आबादी को भी फायदा होगा।
ग्रामीणों के मुताबिक, संगलदीप-अमरिया में बीते वर्ष आई बाढ़ में पांच मकान नदी में विहीन हो गए थे। इससे पूर्व के वर्षों में भी कई लोग आशियाना गवां चुके हैं। जो दर्द भूलकर फिर मकान खड़ा करके डर के साए में जिंदगी बसर कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कटाव निरोधक कार्य से काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
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जनपद बाढ़ प्रभावित नेपाल से आने वाली नदियों में उफान के बाद बाढ़ के हालात उत्पन्न हो जाते हैं। इसमें राप्ती, बूढ़ी राप्ती, बनगंगा, कूड़ा और घोंघी नदी बड़ी तबाही मचाती है। राप्ती को छोड़कर सभी नदी और छोटे नाले नेपाल से ही होकर आते हैं जबकि राप्ती बलरामपुर जनपद के रास्ते आती है। भारी बारिश जैसी नेपाल में शुरू होती है नदियों पर दबाव बढ़ता है तो ऐसे में यहां बाढ़ के हालात उत्पन्न हो जाते हैं। सबसे पहले बूढ़ी राप्ती में सबसे पहले तूफान आता है और सबसे पहले उसी के तट पर बसे लोग बाढ़ की गिरफ्त में आते हैं। इसके बाद राप्ती का नंबर आता है।
इसमें नौगढ़ तहसील क्षेत्र के अमरिया गांव का टोला संगलदीप राप्ती नदी के तट पर बसा है और बाढ़ का पानी सबसे पहले इसी इलाके को अपनी चपेट में लेता है। सबसे पहले बाढ़ से प्रभावित होते हैं और सबसे आखिरी में बाढ़ का पानी खिसकता है। यहां हालात यह बन जाता है कि टापू की तरह से करीब दो हजार की आबादी वाले दोनों गांव घिरे जाते हैं।
गले तक पानी और निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। छतों पर डर के साये में रात और दिन गुजराते हैं और आशियाना विहीन होने का डर हमेशा बना रहता है। क्योंकि, हर वर्ष कई परिवार आशियाना खोता है। वहीं, सैकड़ों बीघा खेत नदी में विलीन हो चुका है। कई रात बांध पर कटती है।
अनहोनी की आशंका के बीच लोग बाढ़ समाप्त होने तक रहते हैं। पिछले साल कई पांच से छह मकान नदी में विलीन हो गए थे। पिछले कई वर्षों से ग्रामीण कटाव स्थल पर मजबूत तटबंध बनाए जाने की मांग कर रहे थे। मौजूदा समय में नदी इस प्रकार से कटान कर रही है कि कई घर तक पहुंच गई है। विधायक श्यामधनी राही के प्रस्ताव पर ग्राम पंचायत अमरिया टोला संगलदीप के सुरक्षार्थ कटाव निरोधक कार्य की परियोजना के लिए 4 करोड़ 67 लाख 56 हजार की स्वीकृति प्रदान की गई है।
शासन से मंजूरी मिलने के बाद प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। तटबंध मजबूत होने से न केवल गांव सुरक्षित रहेगा बल्कि नदी की धारा को भी नियंत्रित किया जा सकेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि जब राप्ती उफान पर होती थी तो पानी की गर्जना से ही दहशत फैल जाती थी। रातों-रात जमीन दरकती थी और सुबह तक घरों की दीवारें झुक जाती थीं। कई परिवारों की वर्षों की जमा पूंजी और मेहनत पानी में बह गई। बच्चों की पढ़ाई बाधित होती थी, मवेशी बह जाते थे और आजीविका पर गहरा संकट छा जाता था। अब तटबंध निर्माण से इस त्रासदी पर स्थायी रोक लगने की उम्मीद जगी है।
हर साल का डर, हर साल की तबाही : गांव के लोगों से बात की गई तो रमेश कुमार, राेहित, सहतू आदि ने बताया कि बरसात शुरू होते ही राप्ती का जलस्तर तेजी से बढ़ता था। नदी की धारा गांव की ओर मुड़ते ही खेतों में खड़ी फसलें जलमग्न हो जाती थीं। पानी के तेज बहाव से मिट्टी कटती और धीरे-धीरे घरों की नींव कमजोर पड़ जाती। कई बार लोग अपनी आंखों के सामने अपने आशियाने को नदी में समाते देखते रहे। प्रशासनिक मदद पहुंचने तक काफी नुकसान हो चुका होता था। ऐसे में बच्चों और महिलाओं को नाव के सहारे सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना पड़ता था। पशुओं को ऊंचे स्थानों पर बांधना पड़ता था। गांव में बिजली और संचार व्यवस्था ठप हो जाती थी। ऐसे में जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाता था। अब तटबंध के मजबूत निर्माण से उम्मीद की जा रही है कि नदी का बहाव नियंत्रित रहेगा और गांव की ओर बढ़ता कटाव थमेगा। इससे न केवल घर सुरक्षित रहेंगे बल्कि ग्रामीणों की खेती, आजीविका और सामाजिक जीवन भी स्थिर रहेगा। ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन के इस निर्णय का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि कार्य गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा होगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां बाढ़ के इस स्थायी भय से मुक्त हो सकें।
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