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बाढ़ का खतरा : अंतिम चरण में काम का दावा, हकीकत में इंतजाम अधूरे

Sun, 14 Jun 2026 12:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। सिंचाई विभाग की ओर से 14 परियोजनाओं पर चल रहा कार्य अंतिम चरण में पहुंचने का दावा किया जा रहा है। प्रशासन ने बाढ़ चौकियां आदि स्थापना की तैयारी भी कर ली गई है। इसके बावजूद कई जगहों पर नदियों के किनारे कटान, अधूरे निर्माण, रेन कट और रैट होल से जर्जर हो चुके बांधों से तबाही का खतरा मंडराता नजर आ रहा है।
यह हाल तब है जब सूबे के मुखिया सीएम योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ बचाव संबंधी कार्य 15 जून तक पूरा करने की निर्धारित समय-सीमा निर्धारित की थी। समय-सीमा पूरी होने में एक दिन का समय और बचा है लेकिन बाढ़ प्रभावित इस जिले में बचाव कार्य और इंतजाम अधूरे नजर आ रहे हैं।
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दो दिन पहले जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन के निरीक्षण में लखनापार-बेदौला बांध के ग्राम भुतहिया के पास चल रहे कटाव निरोधक कार्य में इसकी हकीकत भी देखने को मिली थी। काम की धीमी गति पर नाराजगी जाहिर करते हुए डीएम ने ठेकेदार को नोटिस देने के निर्देश दिए थे। यहां अभी तक सिर्फ 45 प्रतिशत कार्य ही हो पाया था जबकि इसे पूरा करने के लिए पांच जुलाई 2026 तक की समय सीमा तय की गई थी।
बाढ़ से बचाव के लिए राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी के दोनों छोर पर बने बांधों को सिंचाई विभाग पूरी तरह सुरक्षित बता रहा है। विभाग का दावा है कि जहां कुछ दिक्कत है, वहां परियोजनाएं चल रही हैं जो बरसात शुरू होने से पहले पूरी कर ली जाएंगी।
दोनों नदियों के किनारे पर बने बांसी-डुमरियागंज, बांसी-पनघटिया, सोनखर हाटा, नरकटहा सोनखर, जमींदारी आदि बांधों के रख-रखाव का काम किया गया है इसके बावजूद जगह-जगह रेन कट और रैट होल बने नजर आ रहे हैं तो हादसे की आशंका को बढ़ा रहे हैं। यही नहीं इन बांधों में बड़े-बड़े नरकट और झाड़ उगे हुए है जो बांध को कमजोर कर रहे हैं और नदी का जलस्तर बढ़ने पर होने वाले रिसाव को रोकने में भी दुश्वारी पैदा करेंगे।
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पीड़ितों का कहना है कि बाढ़ से बचाव के लिए जिले में नदियों किनारे बने बांध किनारे के गांवों के लोगों की सुरक्षा का सहारा रहता है। नदियों के अत्याधिक जलस्तर बढ़ने पर इनके टूटने से बड़ी तबाही मचती है। रैट होल या बारिश के पानी क्षतिग्रस्त बांधों में दरार रहने से कटान और बांध टूटना का अधिक खतरा रहता है। बीते वर्षों में बांध टूटने की हुई घटनाओं में मची तबाही का मंजर यादकर आज भी बाढ़ पीड़ित कांप उठते है। वहीं, बूढ़ी राप्ती नदी के दक्षिणी पश्चिमी तट पर बना असोगवा-नगवा बांध किनारे तीन कटान स्थल सतवाढ़ी, डढ़िया और नगवा के निकट हुए कटान पर काम कराया गया है।
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