निकाही गांव के लोग बंधे पर लिए शरण। संवाद
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नदी की धारा में बह गए भगौतापुर के पांच मकान
बांसी। बीस वर्ष पहले बूढ़ी राप्ती नदी में घर विलीन हो जाने के बाद भगौतापुर गांव के लोगों ने बाढ़ से निजात पाने के लिये कड़ी मेहनत व खून पसीना बहाकर बांध के पास सुरक्षित स्थान देखकर घर बनाया था, लेकिन बाढ़ ने उनका पीछा नहीं छोड़ा और फिर तबाह कर दिया। बाढ़ में पांच मकान जमींदोज हुए हैं। इस विभीषिका में मकान सहित अपना सब कुछ गंवा चुके लोग अपनी किस्मत को कोस रहे हैं।
भगौतापुर गांव के लोगों को 12 अक्तूबर की रात ताउम्र नहीं भूलेगी। उफनाई बूढ़ी राप्ती नदी ने इस दिन असोगवा-नगवा बांध को उनकी आंखों के सामने तोड़ दिया तो जान बचाने के लिए लोग भाग कर बांध पर आए और वहीं शरण ली है।
बांध टूटने से इंद्रजीत, राम किशुन, विंदेश्वरी, राजा राम व लल्ले के मकान बह गए हैं। इंद्रजीत का मकान उनकी आंखों के सामने एक ही पल में जमीदोज हो गया था। रुंधे गले से इंद्रजीत ने कहा कि तिनका-तिनका जोड़कर बांध के पास यह सोचकर घर बनाया था कि अब उनका घर सुरक्षित है, परंतु बदनसीबी ने साथ नहीं छोड़ा। इस कटान में अपना घर गंवा चुके राम किशन का कहना है कि बीस वर्ष पूर्व जब पुराना मकान नदी में चला गया तो पूरे परिवार ने कड़ी मेहनत कर सिर छिपाने के लिए मकान बनाया था। बाढ़ ने हमारे परिवार से आशियाना छीन लिया। अब यह बूढ़ी आंखें यह कष्ट नहीं झेल पा रही हैं। विंदेश्वरी का कहना है कि उनकी आंखों के सामने घर के साथ सब कुछ बह गया और वह कुछ नहीं कर पाए। राजाराम व लल्ले का इस सैलाब ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। अचानक हुई कटान में वह अपने बच्चों के साथ घर से निकल पाए। सामान बचाने की कोई गुंजाइश नहीं थी।