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Siddharthnagar News: मछली पालन को मिलेगी नई उड़ान, आंध्र मॉडल पर बनेंगे क्लस्टर

Mon, 08 Jun 2026 01:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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- अमृत सरोवरों को मत्स्य उत्पादन से जोड़ने की तैयारी, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को मिलेगा जिम्मा
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- हर तीन किलोमीटर पर विकसित होंगे क्लस्टर, उत्पादन से लेकर विपणन तक बनेगी पूरी शृंखला

सिद्धार्थनगर। प्रदेश में मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में शीर्ष स्थान पर काबिज सिद्धार्थनगर में अब आंध्र प्रदेश मॉडल पर मत्स्य क्लस्टर विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। मत्स्य विभाग और यूपी एग्री के संयुक्त प्रयास से अमृत सरोवरों तथा अन्य सार्वजनिक तालाबों को मत्स्य उत्पादन से जोड़ते हुए गांव स्तर पर क्लस्टर आधारित व्यवस्था विकसित की जाएगी। इस योजना में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को प्रमुख भूमिका दी जाएगी।



जनपद पहले ही प्रदेश के कुल मत्स्य उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ प्रथम स्थान पर है। ऐसे में नई पहल से उत्पादन, रोजगार और कारोबार को और गति मिलने की उम्मीद है। योजना के तहत हर ढाई से तीन किलोमीटर के दायरे में एक क्लस्टर विकसित किया जाएगा, जहां मत्स्य बीज उत्पादन, पालन, प्रसंस्करण और विपणन की समेकित व्यवस्था होगी।
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नेपाल सीमा से सटे सिद्धार्थनगर की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। बड़े उद्योगों के अभाव में मत्स्य पालन यहां ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनकर उभरा है। सरकारी अनुदान और विभागीय योजनाओं के चलते निजी तालाबों का रकबा लगातार बढ़ा है। अब अमृत सरोवरों और अन्य सार्वजनिक जलाशयों को भी इस आर्थिक गतिविधि से जोड़ा जाएगा। योजना के अनुसार छोटे तालाबों में मत्स्य बीज तैयार किए जाएंगे जबकि बड़े जलाशयों में उनका पालन होगा। तैयार मछलियों को स्थानीय स्तर पर ही बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे तालाबों के संरक्षण के साथ ग्रामीणों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।





20-25 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होंगे क्लस्टर



- मत्स्य विभाग के अनुसार प्रत्येक क्लस्टर 20 से 25 हेक्टेयर क्षेत्रफल को आधार बनाकर विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य उत्पादन, विपणन और रोजगार की पूरी शृंखला तैयार करना है। इससे मछली पालकों के साथ-साथ परिवहन, खरीद-बिक्री और प्रसंस्करण से जुड़े लोगों को भी रोजगार मिलेगा।

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4500 हेक्टेयर में हो रहा मत्स्य पालन

- जिले में वर्तमान में 4500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में मत्स्य पालन किया जा रहा है। ग्राम सभा के तालाबों और पोखरों का क्षेत्रफल लगभग 2340 हेक्टेयर है। इसके अलावा 115 किलोमीटर लंबी नदियों और नहरों से भी मत्स्य व्यवसाय जुड़ा है। जिले में प्रतिवर्ष करीब 45,679 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन होता है।





इन ब्लॉकों में सबसे अधिक उत्पादन



- बढ़नी, उसका, नौगढ़ और इटवा ब्लॉक मत्स्य पालन के प्रमुख केंद्र हैं। बढ़नी ब्लॉक का अकरहरा गांव निजी तालाबों के माध्यम से बड़े पैमाने पर मत्स्य उत्पादन के लिए पहचान बना चुका है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत पिछले चार वर्षों में 150 से अधिक लाभार्थियों ने बड़े क्षेत्रफल में तालाब विकसित कर मत्स्य पालन शुरू किया है।





बढ़नी में बन रही मछली मंडी

- मत्स्य उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए बढ़नी क्षेत्र में मछली मंडी का निर्माण भी कराया जा रहा है। मंडी शुरू होने के बाद जिले की मछलियों की बिक्री प्रदेश के अन्य हिस्सों के साथ नेपाल तक होने की संभावना बढ़ जाएगी।



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तालाब भी बचेंगे, रोजगार भी मिलेगा



- अमृत सरोवर और अन्य सार्वजनिक तालाबों की सफाई पर हर वर्ष बड़ी राशि खर्च होती है। नई योजना के तहत इन्हें मत्स्य उत्पादन से जोड़कर आय का स्रोत बनाया जाएगा। इससे जलाशयों का संरक्षण होगा, अतिक्रमण रुकेगा और ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।





मत्स्य पालकों को मिलती है सब्सिडी

- प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत एक हेक्टेयर तालाब निर्माण के लिए सामान्य और पिछड़ा वर्ग के लाभार्थियों को 40 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लाभार्थियों को 60 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है। योजना के माध्यम से जिले में बड़ी संख्या में मत्स्य पालक लाभान्वित हो चुके हैं।
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बोले जिम्मेदार



जिले में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं संचालित हैं। अब अमृत सरोवरों को चयनित कर क्लस्टर आधारित व्यवस्था विकसित करने की तैयारी शुरू की गई है। यूपी एग्री और मत्स्य विभाग संयुक्त रूप से इस दिशा में कार्य कर रहे हैं। योजना लागू होने पर जिले को बड़ा लाभ मिलेगा।

- नंदकिशोर प्रसाद, सहायक निदेशक, मत्स्य विभाग
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