बढ़नी के अकरहरा में 14 फरवरी को होगा मत्स्य आहार प्लांट का उद्घाटन
सिद्धार्थनगर। अब बढ़नी के अकरहरा में ही मछलियों का दाना (आहार) बनेगा। इससे मछली पालन करने वाले लोगों को आसानी होगी। उनकी लागत कम हो जाएगी। आंध्रप्रदेश से आने वाला मत्स्य आहार परिवहन व्यय के चलते पांच रुपये किलो महंगा पड़ता है। प्लांट स्थापित होने के बाद जिले को मछली का हब बनाने का रास्ता साफ हो जाएगा।
मत्स्य विभाग के प्रोजेक्ट के अंतर्गत अकरहरा में 14 फरवरी को जिलाधिकारी संजीव रंजन प्लांट का शिलान्यास करेंगे। वे मत्स्य पालकों को प्रोत्साहित भी करेंगे। 6.74 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित होने वाली यह यूनिट करीब छह माह में तैयार हो जाएगी। दाना बनाने में विदेश से आयातित मशीनों का उपयोग किया जाएगा।
अकरहरा में मछली दाना बनाने की दो यूनिट का प्रोजेक्ट है। एक यूनिट को मंजूरी मिल गई है। बड़े पैमाने पर मछली पालन करने वाले वकार अनवर फैज ने बताया कि जिले में एक माह में ही लगभग 5,000 एमटी मछली दाने की खपत होती है। एक यूनिट से 2,500 एमटी दाना तैयार होगा। आंध्र प्रदेश से मछली दाना आता है तो उसमें 500 रुपये प्रति क्विंटल परिवहन व अन्य व्यय देने पड़ते हैं। एक यूनिट लगने पर 50-60 लोगों को सीधे तौर पर रोजगार प्राप्त होगा।
अकरहरा एवं आसपास के गांवों में कलस्टर प्रोजेक्ट के अंतर्गत 16.8 करोड़ रुपये के 23 प्रोजेक्ट हैं, जिसमें मत्स्य हेचरी बनाने की योजना है। हेचरी बन जाएगी तो कोलकाता से मछली बीज नहीं लाना होगा। इससे मछली पालकों को और फायदा होगा।
सहायक मत्स्य अधिकारी पुष्पारानी तिवारी ने बताया कि हाल ही में हुए सर्वे के अनुसार, जिले में 4,599 हेक्टेयर जल क्षेत्र में मछली का पालन किया जाता है। प्रति वर्ष 45679 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन होता है, जो 110-150 रुपये प्रति किलो की दर से बिकती है। इस व्यवसाय का वार्षिक टर्न ओवर 559.1 करोड़ रुपये है। करीब 4,500 लोग मछली पालन कर रहे हैं। इसमें प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से 20 से 22 हजार लोगों को रोजगार मिल रहा है। कोरोना काल के बाद जिले में मछली पालन की ओर लोगोें का रुझान बढ़ा है।
वर्जन-
बढ़नी के अकरहरा गांव में मत्स्य आहार प्लांट बनाने का प्रोजेक्ट मंजूर हो गया है। आहार प्लांट बनने के बाद जिले में मछली का दाना सस्ता हो जाएगा। मछली पालकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि विकास और रोजगार सृजन हो। -संजीव रंजन, जिलाधिकारी