संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले की मछलियों को नेपाल में खपाकर डेढ़ गुना मुनाफा कमाया जा रहा है। तस्कर साइकिल से मछली को सीमा पार कराने का धंधा कर रहे हैं। इसमें वे राजस्व को भी चुना लगा रहे हैं, जबकि संसाधनों के अभाव में सीधे तौर पर निर्यात नहीं हो पा रहा है।
जिले की 68 किमी सीमा नेपाल से लगी हुई है, जो खुली सीमा है। साइकिल सवार मछली बेचने वाले मौका पाते ही इस पार से उस पार पहुंच जाते हैं और दाम डेढ़ गुना हो जाता है। वैसे तो चेकपोस्ट पर रोक टोक होती है, लेकिन गैर परंपरागत रास्ते तस्करी के लिए विकल्प बन गए हैं।
जिले में मंडी व प्राेसेसिंग यूनिट नहीं होने के कारण मछलियों का निर्यात नहीं हो पा रहा है, इस कारण जिले की मछली नेपाल भेजना प्रतिबंधित है। बढ़नी कस्बे के एक व्यापारी ने बताया कि तस्करी के कारण ही मछलियां खप रही हैं।
हर दिन 200 क्विंटल से अधिक मछलियां नेपाल में भेजी जा रही है। जिले में मछलियों का उत्पादन बढ़ा और मांग कम हुई तो भाव भी गिर गया। इस कारण कुछ बिचौलिए नेपाल में मछली का धंधा करके मुनाफा कमा रहे हैं। जिले में पंगेसियस प्रजाति की मछली 95 रुपये किलो है, जो नेपाल के सीमावर्ती इलाके में ही 120-130 रुपये किलो बिक रही है, जबकि 100 किमी अंदर नेपाल में जाने पर वही मछली 150 से 160 रुपये किलो बिक जाती है। रोहू प्रजाति की मछली 220 रुपये किलो है, जो नेपाल में 300 रुपये से अधिक में बिक जाती है।
इसी प्रकार रूपचंदा प्रजाति की मछली 120 रुपये किलो से बढ़कर 190 रुपये किलो हो जाती है। हालांकि, भारतीय मछली को नेपाल में बेचना प्रतिबंधित है। नेपाल पुलिस ने पकड़ लिया तो मछली नष्ट करा देगी और कार्रवाई करेगी।