नेपाल सीमा से सटे अलीगढ़वा कस्बे में स्थित हाजी कटरे में 12 दुकानदारों ने सामान रखने के लिए गोदाम बना रखे हैं। इसमें कुछ लोग दुकानें भी चलाते हैं। मंगलवार को दोपहर तकरीबन एक बजे बम जैसा तेज विस्फोट हुआ और देखते ही देखते आग फैल गई। धमाका इतना तेज था कि पूरा कस्बा दहल उठा। इसकी गूंज दूसरे दिन बुधवार को भी लोगों के कानों में सुनाई दे रही है। लोग खौफजदा हैं।
घटनास्थल पर जब पड़ताल की गई तो लोग कई प्रकार की चर्चा करते नजर आए। घटना के स्थान के आसपास के क्षेत्र को पुलिस ने घेर रखा है। मुख्य मार्ग पर लोगों का समूह जुटा हुआ था। इसमें एक व्यक्ति ने कहा कि अगर बोले तो प्रशासन के लोग परेशान करेंगे। लेकिन यहां पटाखा बनाने और बेचने का कार्य चलता है।
यहीं से पटाखा इधर से उधर जाता है। वहीं, दूसरे ने कहा कि यहां हर सीजन में पटाखा लाकर डंप किया जाता था। इसे त्योहार में बेचा जाता है। विस्फोट का कारण बड़ी मात्रा में पटाखे रखना हो सकता है। लेकिन कुछ बोलेंगे तो प्रशासन के लोग पकड़ लेंगे। यह कहते हुए अन्य लोग खामोश हो गए। अन्य लोग भी दबी जुबान से बम बनाए जाने की बात कह रहे हैं।
फिलहाल, 30 घंटे बाद भी धमाके की आग सुलग रही है। धुआं उठ रहा है। सामान के जलने के साथ ही लाशों के जलने की बू आने की लोग चर्चा कर रहे हैं। आशंका व्यक्त की जा रही है कि और लोग दबे हो सकते हैं। अभी कई कमरों से मलबा हटा नहीं है।
सीमा पार करते हुए नेपाल सीमा में पहुंचे तो यहां चाय की दुकान पर कई लोग थे। इसमें लोग दो से पांच किलोमीटर के दायरे वाले गांव के निवासी थे। भारतीय सीमा मेें हुई घटना की लोग चर्चा कर रहे थे। इसमें सीमा से पांच किलोमीटर दूरी पर स्थित अटकोनिया गांव के तीन लोग थे। बात-बात में लोग कहते हुए दिखे कि हमका लाग कि हमला होई गय है। खेत में काम कर रहे थे। बम दगे जईसन आवाज आईल तो डर गईली। कुछ देर बाद पता लगा कि अलीगढ़वा महियां बम दगी गय है। जेहका आग बुझी नाई है। वहीं दूसरे व्यक्ति ने कहा कि ईंहा से लोग हमेशा पटाखा लाई जात रहे। बहुत ज्यादा रखा रहा तबय दगी गय। अबहीं आवाज सुनात बाय। बार्डर उसपर नेपाल में लगभग सभी दुकानों पर धमाके की चर्चा हो रही थी।
विस्फोट की भयावहता बयां कर रहा है जमींदोज मकान
नेपाल में जाने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा की सड़क पर मुख्य गेट से 50 कदम पहले से एक गली से होकर धमाका होने वाले स्थल पर पहुंचे। मुख्य मार्ग से यहां की दूरी तकरीबन 100 मीटर होगी। कटरे तक जाने वाले मार्ग के दोनों तरफ 100 से अधिक दुकानें हैं। इसके बाद कटरा तक पहुंचे। कटरा यहां का आखिरी मकान था। इसकी लंबाई लगभग 90 फुट और चौड़ाई तकरीबन 80 फुट है। इस मकान में चारों तरफ से कमरे निकाले गए थे। लगभग 20 दुकानें बनी हैं। इसमें गोदाम के साथ ही टेलर, जूता-चप्पल और दुकानें भी हैं। धमाके का अंदाजा कोई नहीं लगा पा रहा था। कटरे की नींव तक हिल चुकी है।
धमाका इतना तेज था कि कई दीवारें टूटकर जमींदोज हो गईं। बीम में सरिया बचा, गिट्टियां गायब हो चुकी हैं। वहीं, दुकान पर लगे शटर धमाके के कारण दीवार को तोड़ते हुए बाहर गिर गए। कई तो लोहे तक गलकर टेढ़े हो चुके हैं। मकान का शायद ही कोई हिस्सा है जो तबाह न हुआ हो। कटरे के ठीक सामने 15 फुट आगे सामने वाले मकान में छह दुकानें चलती हैं।
धमाके से इसकी दीवार हिल गई। कुछ कमरों के हिस्से टूट गए हैं। दीवार में दरारें नजर आईं। प्रशासन रेफ्रिजरेटर का मोटर बलास्ट होने की बात कर रहा है। घटनास्थल पर रेफ्रिजरेटर के मोटर तो मिले लेकिन सभी फटे नहीं, बल्कि आग लगने से जले हुए हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि यहां होने वाली बड़ी साजिश को छुपाया जा रहा है। कुछ लोग आरडीएक्स से धमाका होने की आशंका व्यक्त कर रहे हैं।
जो अलीगढ़वा कस्बा नेपाल और भारतीय लोगों से सुबह सात से रात नौ बजे तक हर दिन गुलजार रहता था। वहां बुधवार को सन्नाटा छाया हुआ था। दुकानें बंद थीं और हर जुबान पर धमाके की चर्चा थी। घटना के कारण लोगों ने दुकानें नहीं खोलीं। घटना को लेकर लोगों में गम भी दिखा।
अगर बाजार के दिन होता धमाका तो जाती और जान
अलीगढ़वा कस्बे में ही जिस स्थान पर धमाका हुआ है। वहीं, बगल में ही बृहस्पस्तिवार को बाजार लगती है। इसमें भारतीय लोग कम, नेपाल से बड़ी संख्या में लोग साप्ताहिक बाजार करने के लिए आते हैं। यहां लगभग 50 हजार की भीड़ होती है। जिस कटरे में धमाका हुआ है, वहीं लोग उसी गली में सामान खरीदने के लिए आते हैं। ऐसे में अगर उस दिन घटना होती तो न जानें कितने लोगों की जान जाती।
बम निरोधक दस्ता भी धमाके से हैरान
घटना की जानकारी मिलने के बाद लखनऊ से संचालित होने वाले गोरखपुर का बम निरोधक दस्ता और फॉरेंसिक टीम के लोग रात में ही पहुंच गए थे। दोपहर दो बजे तक ये लोग थे। धमाके के बारे में जब इनसे बात करने की कोशिश की तो कुछ बोलने से इन्कार कर दिए। लेकिन घटनास्थल की स्थिति को देखने के बाद यह मान रहे थे कि धमाका रेफ्रिजरेटर या गैस सिलिंडर का नहीं है। क्योंकि मकान पूरी तरह से तबाह हो चुका है। गैस सिलिंडर और रेफ्रिजरेटर से इतना नुकसान नहीं पहुंचेगा। मकान की स्थिति को देखकर वे भी हैरान थे। विस्फोटक से धमाके की आपस में चर्चा कर रहे थे। हालांकि, यह आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
नेपाल सीमा पर स्थित अलीगढ़वा कस्बे में विस्फोट होने की जानकारी के बाद एटीएस (एंटी टररिस्ट स्क्वाॅड) की टीम रात में ही मौके पर पहुंच गई। सूत्रों के मुताबिक, लखनऊ से आए एटीएस के जवान रात से ही सर्च अभियान शुरू कर दिए। धमाके से निकले कुछ कण और अन्य हिस्सों को एकत्र भी किए और चारों तरफ घूमकर घटना की बारीकी से जांच की। आसपास के लोगों से कुछ जानकारी ली। टीम दोपहर दो बजे तक कपिलवस्तु कोतवाली और घटना स्थल मिलाकर दौड़ती रही। किसी भी स्थानीय सुरक्षा एजेंसी से बात नहीं की।
पटाखे लेकर जाने की हो रही है चर्चा
लोगों के मुताबिक, धमाके के बाद सुरक्षा एजेंसी से जुड़े कुछ लोग तीन बोरी से अधिक तेज से आवाज वाले पटाखे लेकर जाकर कहीं छिपा दिए। ताकि किसी को जानकारी न मिल सके कि यहां पर पटाखे बनते या बिकते थे। स्थानीय लोग यह कर रहे हैं कि पटाखे लंबे समय से बिक रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने प्रशासन की नाकामी और घटना को दबाने के लिए उसे कहीं ले जाकर फेंक दिया है।
पीछे है ताल, उसके बाद नेपाल बाॅर्डर
जिस स्थल पर विस्फोट हुआ है, वहीं से चंद कदम पर ताल और बांध है जो दोनों देशों की सीमा को जोड़ता है। बताते हैं कि रात में ताल के रास्ते से ही तस्कर सामान लेकर जाते हैं। हो सकता है कि दीपावली को देखते हुए पटाखे जुटाए गए हों और रात के अंधेरे में उसे बाॅर्डर पार कर दिया जा रहा हो।