लोटन क्षेत्र के एक विद्यालय में नहीं हुआ विद्युतीकरण।
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सिद्धार्थनगर। परिषदीय स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को बल्ब की रोशनी और पंखे की हवा में पढ़ाई कराने का फरमान हवा में उड़ गया है। वर्षों बाद भी स्कूलों में न तो कनेक्शन हुए और न ही विद्युत उपकरण लगे। इस मद में आई धनराशि कहां गई, इसे भी पूछने वाला कोई नहीं है। हालत यह है कि वर्षों बाद भी बच्चे उमसभरी गर्मी में पढ़ाई को मजबूर हैं।
प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में बेसिक शिक्षा परिषद ने विद्युतीकरण कराकर पंखा, बल्ब लगाने का निर्देश दिया था। लोटन ब्लाक के 80 प्राथमिक व 40 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में से वर्ष 2009 से 2013 के मध्य तक 9 पूर्व माध्यमिक और 25 प्राथमिक विद्यालयों का चयन किया गया था। इन स्कूलों को 21 हजार रुपये विद्युतीकरण व कनेक्शन के लिए दिए गए थे। पांच वर्ष बीतने के बाद भी विद्यालयों में न तो पंखे चल रहे हैं और न ही बल्ब जल रहा है।
कुछ स्कूलों में तो पंखे-बल्ब नजर ही नहीं आते। सूत्रों के मुताबिक विभाग की उदासीनता से पंखे गुरुजी के घर पहुंच गए, बल्ब का इस्तेमाल भी वही कर रहे हैं, जबकि विभाग भुगतान दे रहा है। यह हाल पूरे जिले का है। घोटाले के इस बड़े मामले में विभागीय जिम्मेदार उदासीन बने हुए हैं। सरकारी धन के बारे में पूछताछ करने की भी किसी को फिक्र नहीं है। लोटन की खंड शिक्षा अधिकारी रीता गुप्ता ने बताया कि ब्लाक के किन-किन विद्यालयों में बिजली व पंखा लगाने के लिए किस वर्ष में और कितना धन आया था, इसकी सूची फिलहाल हमारे पास नहीं है। सूची उपलब्ध होने के बाद जांच कर कार्रवाई की जाएगी।