किसानों को 35 वर्ष बाद भी नहीं मिला मुआवजा
बिना मुआवजा दिए सिंचाई विभाग ने बानगंगा के किनारे बना दिया था बांध
शोहरतगढ़ तहसील के ग्राम बगुलहवा के किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी
शोहरतगढ़। बिना मुआवजा दिए ही शोहरतगढ़ क्षेत्र के बगुलहवा गांव के किसानों की भूमि में 35 वर्ष पूर्व सिंचाई विभाग ने बांध बना दिया। परेशान किसानों ने उच्च न्यायालय की शरण ली। उच्च न्यायालय से आदेश जारी होने के 10 माह बाद भी किसानों को मुआवजा नहीं मिल सका है। इससे नाराज किसानों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
बानगंगा नदी के बाएं हिस्से में बसे शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के बगुलहवा, भादएहतमाली और आसपास के गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए ड्रेनेज खंड सिंचाई विभाग ने वर्ष 1985-86 में बांध निर्माण किया था। बांध निर्माण में अधिग्रहीत की गई बगुलहवा गांव निवासी बहाऊ, तबरकुल्लाह, मो. यूनुस, मुकीम, मुहम्मद जफर, गुलाम मुहीउद्दीन, शहादत हुसैन, वाहिद, अमीन, मो. समी, रफीक, मुहम्मद अयूब, फुद्दन, दशरथ, नुरुल, बैतुल्ला समेत 81 किसानों की भूमि का मुआवजा नहीं दिया गया। किसानों ने मुआवजे के लिए बार-बार गुहार लगाई तो ड्रेनेज खंड सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता ने 12 मार्च 2019 को डीएम को पत्र भेजकर सूचित किया कि बांध निर्माण कार्य के लिए विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी बस्ती ने भूमि अधिग्रहीत की थी, इसलिए मुआवजे की जिम्मेदारी उन्हीं की है। इसके मुआवजे के लिए 1990 में अभिलेख बस्ती भेजा भी गया था।
13 फरवरी को हाईकोर्ट ने अविलंब मुआवजा देने का दिया था आदेश
मुआवजे के लिए परेशान बहाऊ आदि किसानों ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में वाद दाखिल किया। 13 फरवरी 2020 उच्च न्यायालय ने किसानों को अविलंब जमीनों के मुआवजे का भुगतान किए जाने का आदेश दिया। जिस पर विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी सिद्धार्थनगर ने नोटिस जारी कर किसान को कार्यालय बुलाकर उनका बयान दर्ज कराया। इसके बाद अगस्त 2020 में राजस्व विभाग ने बांध की पैमाइश कर सीमांकन किया। सितंबर 2020 में सिंचाई विभाग ने पैमाइश कराई लेकिन किसान अब तक मुआवजे के लिए चक्कर काट रहे हैं।
दोबारा खटखटाएंगे हाईकोर्ट का दरवाजा
35 वर्ष से मुआवजे के लिए भटक रहे अबुतलहा, अबुल कलाम, जैनूल्लाह, खलील, जलील आदि किसानों ने समाजसेवी अल्ताफ चौधरी, मो. रफीक चौधरी के नेतृत्व एसडीएम को ज्ञापन देकर मुआवजे की जल्द भुगतान मांग की। उन्होंने कहा कि प्रशासन की लापरवाही के चलते कई वर्षों से किसानों को अपनी भूमि की कीमत नहीं मिल पा रही। यदि शीघ्र किसानों को मुआवजा नही दिया गया तो दोबारा उच्च न्यायालय जाने के साथ ही आंदोलन की जाएगी।