भारतभारी। कृषि विज्ञान केंद्र सोहना पर जमीनी स्तर पर कार्यरत कृषि प्रसार कार्यकर्ताओं के क्षमता संवर्धन के लिए कालानमक बीज उत्पादन तकनीक विषय पर शनिवार को प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
पहले दिन केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि कालानमक चावल स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक है। उन्होंने बताया कि जनपद में 20 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में इसकी खेती होती है, इसको और बढ़ाने की आवश्यकता है। कालानमक धान की खेती करके किसान अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार होगा। ई. अशोक कुमार पांडेय ने बताया कि कालानमक धान में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कम से कम करें। यदि जैविक तरीके से उत्पादन करते हैं तो चावल की गुणवत्ता अच्छी होती है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. सर्वजीत ने बताया कि कालानमक बीज उत्पादन के लिए ऐसे स्थान का चयन करें, जहां जलभराव की समस्या न हो।
केंद्र के पशु विज्ञान वैज्ञानिक डॉ. सुनील सिंह ने बताया कि बीज उत्पादन के बाद गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अच्छी तरह से भंडारण करना चाहिए। इसमें प्रयोग होने वाले पात्र नए होने चाहिए।