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किसान की मौत, परिजनों का दावा ठंड ने जी जान

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किसान की मौत, परिजनों का दावा, ठंड से गई जान
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डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के गेरुईया गांव का मामला
प्रशासन ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया
लेखपाल ने मौके पर पहुंच कर ली जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के गांव गेरुईया निवासी 70 वर्षीय किसान मुनेश्वर मौर्य की शनिवार सुबह मौत हो गई। बेटे तिलकराम और परिवारवालों ने ठंड लगने से मौत होने का दावा किया। किसान की मौत की जानकारी मिलने पर हलका लेखपाल मौके पर पहुंचे और रिपोर्ट बना कर प्रशासन को भेजा। मौत का कारण जानने के लिए शव को पीएम के लिए भेजा गया।
तिलकराम के अनुसार पिता मुनेश्वर मौर्य शनिवार की सुबह उठने के बाद नित्यक्रिया से मुक्त हुए। इसके बाद जानवरों को चारा देने लगे, इसी दौरान बेहोश होकर गिर पड़े। परिजनों ने तुरंत ही नजदीक के चिकित्सक को बुलाया। चिकित्सक ने बताया कि मुनेश्वर मौर्य को ठंड लग गई है और उनका बचना मुश्किल है। परिजन मुनेश्वर को अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे थे कि उनकी सांसें थम गईं। तिलकराम ने पिता की मौत ठंड लगने से होने की जानकारी तहसील प्रशासन और त्रिलोकपुर थाने को दी। हलका लेखपाल ओमप्रकाश ने मौके पर पहुंच कर तिलकराम से जानकारी ली। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट बनाकर भेजेंगे। त्रिलोकपुर थानाध्यक्ष जयप्रकाश तिवारी ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होगा कि मृत्यु ठंड लगने से हुई या प्राकृतिक रूप से। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। इस बाबत एसडीएम त्रिभुवन से बात करने की कोशिश की गई लेकिन लगातार प्रयास के बावजूद कॉल रिसीव नहीं हुई। उनका पक्ष मिलने पर प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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क्षेत्र में नहीं जलता है अलाव
गेरुइया गांव ही नहीं आसपास के क्षेत्र में प्रशासन की ओर से अलाव की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। गांववालों का कहना है कि इतनी सर्दी के बावजूद न तो ग्राम पंचायत और न ही प्रशासन ने कभी अलाव जलवाया। अलाव नहीं जलवाए जाने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी पशुओं को खासकर बेसहारा पशुओं को होती है। लेखपाल ओमप्रकाश ने बताया कि उनके हलके में कहीं भी अलाव नहीं जलाया जाता है।
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परिवार की आर्थिक हालत खराब
तिलकराम ने बताया कि परिवार के आर्थिक स्थिति काफी खराब हैं। पिता मुनेश्वर मौर्य को वर्ष 1971 में एक बीघा जमीन पट्टे पर मिली थी। इसी जमीन पर खेती कर उन्होंने परिवार का पालन पोषण किया। तिलकराम को भी जनवरी 2021 में पहली बार सरकारी राशन मिला। नौ सदस्यों के परिवार का भरण पोषण में काफी मुश्किल होता है।
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