संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। प्रयागराज महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर स्नान और दान के लिए श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। बुधवार को मौनी अमावस्या पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु घर से निकल पड़े। सरकार की ओर से विशेष ट्रेन और बस की व्यवस्था की गई है।
श्रद्धालुओं की सुलभता को देखते हुए दो दिन के लिए विशेष ट्रेन झूंसी एक्सप्रेस और रोडवेज प्रशासन की ओर से तहसील मुख्यालय पर बसों की व्यवस्था का दावा किया गया था। सुविधा के दावों की हकीकत जानने के लिए मंगलवार को सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन और रोडवेज स्टेशन की पड़ताल की गई। हालात ऐसे थे कि रेलवे स्टेशन पर विशेष ट्रेन में चढ़ने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा है।
ट्रेन में घुसने के लिए कोई बोरी फेंक कर सीट पर कब्जा करने की कोशिश करता दिखा, तो कोई एक- दूसरे का हाथ पकड़कर अंदर खींचते और पीछे से धक्का देते नजर आया।
ट्रेन की बोगी में आपातकालीन खिड़की के रास्ते भी लोगों को घुसते देखा गया। वहीं, रोडवेज बस स्टेशन परिसर में जहां परिचालक इंतजार कर रहे थे कि यात्री आ जाएं तो बस चले। वहीं यात्री बसों में चढ़ने के लिए धक्का-मुक्की और दौड़भाग करते नजर आए। जैसे ही बस पहुंच रही थी, लोग उसमें चढ़ने के लिए दौड़ लगा देते थे, लेकिन संगम में स्नान की आस्था लेकर आए श्रद्धालु इन मुसीबतों के बाद जरा भी घबराए नहीं दिखे। उनके चेहरे पर खुशी और जुबान से गंगा मैया का नाम निकल रहा था। कमोबेश यही हाल तहसील मुख्यालय पर देखने को मिला।
रेलवे स्टेशन और रोडवेज पर दिखा यह नजारा : मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे प्रशासन की ओर से लखनऊ से प्रयागराज संगम तट के पास झूंसी रेलवे स्टेशन के लिए 28 और 29 जनवरी को विशेष ट्रेन की सुविधा की गई है। लखनऊ से चलने वाली यह ट्रेन मंगलवार को सबुह 10:22 बजे सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन पर पहुंची। यहां यात्रियों की लंबी कतार पहले से ही प्लेटफाॅर्म पर लगी थी।
श्रद्धालु जय गंगा मैया, जय भोलेनाथ का जयघोष कर रहे थे। ट्रेन पहले ही यात्रियों से खचाखच भरी थी। इसके बावजूद ट्रेन के ठहरते ही यात्री टूट पड़े। दरवाजा खोलो कह कर लोग एक- दूसरे को खींचते दिखे। इसके के साथ ही सीट कब्जा करने के लिए झोला और गमछा फेंककर कोशिश कर रहे थे। वहीं, कुछ लोग आपातकालीन खिड़की के रास्ते भी घुसते नजर आए। लगभग चार मिनट के ठहराव में अधिकतर लोग छूट गए। क्योंकि घुसने तक की जगह नहीं थी। ट्रेन में जो घुसा गया उसे लग रहा था कि कोई लड़ाई जीत गया। क्योंकि चेहरे पर इस प्रकार का उमंग था।
उसका निवासी राकेश अपनी मां को लेकर जा रहे थे। ट्रेन में तो नहीं चढ़ पाए, लेकिन उन्हें जरा भी मलाल नहीं था। उन्होंने कहा कि स्नान कल है, चाहे जैसे पहुंचेगे, लेकिन जाएंगे जरूर। इसके बाद वह रोडवेज बस स्टेशन की ओर बढ़ गए। वहीं, लोटन क्षेत्र के निवासी रमाकांत पिता और मौसा को लेकर जाने के लिए आए थे। दो बुजुर्ग साथ में थे। इसलिए वह ट्रेन में नहीं चढ़ सके। उन्होंने कहा कि तय समय पर आ गए थे, लेकिन उम्मीद नहीं थी कि इतनी भीड़ हो जाएगी।
कुछ यही हाल राकेश मिश्र, संगम और चिनकू यादव का रहा, जो ट्रेन में सवार होने में कामयाब नहीं हो सके, लेकिन जाने के लिए हौसले बुलंद थे। वहीं, रोडवेज पर पहुंचे तो यहां कुछ अलग ही नजारा दिखा। जहां एक- एक यात्री का इंतजार करने के बाद बस चलती थी।