डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित बड़े इमामबाड़े से कर्बला के शहीदों की याद में 72 ताबूत का जुलूस निकला। इस दौरान अकीदतमंदों की आंखों से आंसू छलक पड़े। चारों तरफ सदाएं बुलंद होती रहीं। ताबूत का जुलूस देर शाम कर्बला पर मातम के बीच समाप्त हुआ। अंजुमन गुलदस्ता, हैदरी बैगनबाड़ी मुंबई व मोमनीन ए हल्लौर ने मरसिया मजलिस आयोजित किया। मरसियाख्वानी हैदरे कर्रार व हमनवा ने किया।
गुरुवार को जाकिरे अहलेबैत जमाल हैदर रिजवी ने खिताब करते हुए कर्बला के 72 शहीदों की दास्तां बयां किया। ताबूतों की जियारत के लिए अकीदतमंद बहुत पहले से ही पहुंचना शुरू हो गए थे। अंत में हजरत अब्बास का अलम और इमाम हुसैन की सवारी जुलजनाह निकाली गई। अंजुमन गुलदस्ता मातम व अंजुमन फरोग मातम ने संयुक्त रूप से सीनाजनी किया। ताबूत हजरत अब्बास की दरगाह से होता हुआ कर्बला पहुंच कर खत्म हुआ। ताबूतों ़पर अकीदतमंदों ने चादर व फूलमाला चढ़ाकर मन्नतें मांगी। जियारत के लिए भटगवां, हटवा, टड़वा, वासा, बेंवा, जमौतिया, तिलगड़िया के अलावा लखनऊ, गोरखपुर, बस्ती, मुंबई आदि स्थानों के लोग भी पहुंचे।
लोगों ने अकीदतमंदों के लिए जगह-जगह चाय का स्टाल लगाया। इस दौरान अजीम हैदर, काजिम मेंहदी, ताकीब रिजवी, वजीर हैदर, जानशीन, मोहम्मद रउफ नौशा, मोहम्मद हसन, लल्लन अली, इंतजार हैदर, तौफीक हसन, अकबर मेंहदी उर्फ छब्बन, मेंहदी पप्पू, नम्मू, गुड्डू मास्टर, शमशाद हैदर, वजीर हैदर, तसवीब हसन, काजिम रजा, सिपते हैदर, हुसैन कदर, साहिल, खुलूस, शकील गुड्डू, मंजर मास्टर आदि मौजूद रहे।