सिद्धार्थनगर। कालानमक चावल को अब विशिष्ट श्रेणी के चावल का दर्जा देने की मांग उठ रही है। गैर बासमती चावल का निर्यात बंद हुआ तो कालानमक चावल का निर्यात भी बंद हो गया, जबकि स्वाद, सुगंध एवं पौष्टिक तत्वों के लिहाज कालानमक चावल विशेष है। साल 2018 में कालानमक चावल को ओडीओपी में शामिल किया गया था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार के बाद कालानमक की मांग और कीमत बढ़ गई, लेकिन निर्यात बंद होते ही कालानमक की कीमतों में गिरावट आ गई है।
जिले में सांसद जगदंबिका पाल, राज्य सभा सदस्य बृजलाल एवं कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरसी चौधरी ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय को पत्र भेजा है, लेकिन पांच माह बाद भी इस चावल का निर्यात नहीं शुरू हो सका है। इस मामले में कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरसी चौधरी ने बताया कि कालानमक चावल के मामले में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र दिया दिया और मुख्यमंत्री कार्यालय से भी केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय को पत्र भेजा गया है। जुलाई 2023 में चावल के निर्यात पर रोक लगाई, लेकिन इसमें बासमती चावल शामिल नहीं है। बासमती की तर्ज पर कालानमक चावल को भी एचएसएन कोड मिलना चाहिए ताकि निर्यात शुरू हो सके।
उन्होंने कहा कि गोरखपुर, बस्ती एवं देवीपाटन मंडल के 11 जिलों में कालानमक चावल के लिए भौगोलिक सूचकांक जारी किया है, इस क्षेत्र में कालानमक के लिए मुफीद जलवायु है। एक साल पहले तक कालानमक चावल 15 हजार रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है, जबकि अब 10 हजार रुपये क्विंटल के आसपास कीमत हो गई है। सिंगापुर, नेपाल व दुबई से 2000 क्विंटल निर्यात की मांग है, लेकिन रोक नहीं हटने से समस्याएं आ रही हैं।
इसी प्रकार मणिपुर का काला चावल, असम का जोहा एवं बिहार की कतरनी सहित अन्य चावल को विशिष्ट चावल का दर्जा दिया जाना चाहिए। इसमें देश के विभिन्न अंचलों के चावल के लिए भी निर्यात की राह खुल जाएगी, जबकि सबकी अपनी-अपनी विशेषता है।
जिलाधिकारी पवन अग्रवाल ने बताया कि कालानमक चावल का निर्यात शुरू करने के लिए उत्तर प्रदेश शासन ने भी केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय को पत्र भेजा है, संभावना है कि कालानमक चावल के लिए एचएसएन कोड मिल जाएगा।
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वर्जन
कालानमक चावल का निर्यात शुरू करने के लिए मैं लगातार सक्रिय हूं। मैंने संसद में स्थगन प्रस्ताव के तहत गैर-बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध का मुद्दा उठाया है, जबकि पत्राचार भी कर रहा हूं। यह निर्यात प्रतिबंध क्षेत्र के उत्पादकों और विकास के लिए एक बड़ी चुनौती है। सिद्धार्थनगर कालानमक चावल के प्राथमिक निर्यात केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है और इसमें प्रतिबंध लगाने से स्थानीय किसानों पर असर पड़ेगा।
-जगदंबिका पाल, सांसद
मैंने केंद्रीय कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री को गैर बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध हटाकर कालानमक को विशिष्ट चावल का दर्जा देते हुए निर्यात शुरू करने के लिए पत्र लिखा है। ओडीओपी में शामिल कालानमक चावल की ब्रांडिंग हुई तो निर्यात की मांग बढ़ गई। कालानमक धान का रकबा 16 हजार हेक्टेयर हो गया है। निर्यात शुरू नहीं होगा तो किसानों का नुकसान होगा।
-बृजलाल, राज्य सभा सदस्य