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बर्ड फ्लू के संभावित वाहक विदेशी पक्षी बने सिरदर्द

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बर्ड फ्लू के संभावित वाहक विदेशी पक्षी बने सिरदर्द
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जिले में विभिन्न स्थलों पर आने वाले विदेशी पक्षियों की होगी निगरानी
मृत पक्षियों का होगा पीएम, सीरम जांच के लिए भेजा जाएगा भोपाल
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। ठंड के मौसम में जिले में आने वाले विदेशी पक्षियों को देखने को लोग आतुर रहते थे, लेकिन एवियन इंफ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) के प्रकोप के कारण अब इनका जिले में आना ही सिरदर्द साबित हो रहा है। वन विभाग ने बर्ड फ्लू से बचाव के तहत प्रवासी पक्षियों के आने वाले स्थलों की निगरानी एवं उनकी सीरम जांच के लिए भोपाल भेजने का निर्देश दिया है।
बीते कई दशक से ठंड के मौसम में जिले के बर्डपुर, डुमरियागंज, इटवा, बांसी और शोहरतगढ़ क्षेत्र के जलभराव वाले स्थलों पर विदेशी पक्षियों का आना लगा रहता है। विभिन्न प्रकार की प्रजातियों और रंगों वाले इन विदेशी पक्षियों को देखने के लिए लोग आतुर रहते थे। अब जबकि यह संभावित है कि इन विदेशी पक्षियों के चलते विश्व समेत देश के विभिन्न प्रदेशों में बर्ड फ्लू जैसी गंभीर संक्रामक बीमारी फैल रही है तब से इनका जिले में आना भी एक समस्या साबित होने लगी है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्य जीव सुनील पांडेय ने डीएफओ को भेजे गए पत्र में कहा है कि प्रवासी पक्षियों के आने वाले स्थलों को चिन्हित कर उनकी निगरानी की जाए। यहां पक्षियों की मौत होने पर उनका पोस्टमार्टम कराने के साथ ही विदेशी पक्षियों को पकड़ कर उनका सीरम लेकर जांच के लिए भोपाल भेजा जाए। डीएफओ आकाशदीप बधावन ने बताया कि बर्ड फ्लू से बचाव एवं सुरक्षा के तहत प्रवासी पक्षियों के आने वाले स्थलों की निगरानी, मृत पक्षियों का पोस्टमार्टम एवं उनका सीरम जांच के लिए भोपाल भेजे जाने का निर्देश मिला है, जिसका अनुपालन किया जाएगा।
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डीएम के अध्यक्षता में समिति गठित
प्रवासी पक्षियों के आने वाले स्थलों के चिह्नांकन, निगरानी आदि के लिए डीएम दीपक मीणा की अध्यक्षता में टीम गठित की जाएगी। इसमें डीएफओ, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता, सीबीओ शामिल होंगे। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि प्रवासी पक्षियों के आने वाले सभी जलस्थलों की निगरानी के लिए तहसीलवार टीम गठित की गई है।
जिले में इन स्थलों पर आते हैं प्रवासी पक्षी
प्रवासी पक्षियों का सर्वाधिक आगमन शोहरतगढ़ एवं बर्डपुर क्षेत्र के मझौली सागर, मोती सागर, बजहा सागर, महली सागर, मरथी सागर, महसैया सागर में होता है। इसके साथ ही डुमरियागंज के लेवड़ ताल, इनावल ताल, सिकहरा ताल में भी प्रवासी पक्षियों का आगमन होता है। पहले लोग इन्हें देखने को आतुर रहते थे और दूर-दराज से लोग आते हैं।
साइबेरियन क्षेत्र से आते हैं पक्षी
ठंड के मौसम में विश्व के विभिन्न स्थानों से पक्षी यहां आते हैं। इनमें रूस, चीन, मंगोलिया समेत विश्व के ठंडे स्थलों से पक्षी यहां आते हैं, जिनमें अधिकांश साइबेरियन होते हैं। इनमें यहां कयमा, पुछार, पटेरा, टिक्का, लालसर, सुर्खाब, सारस व बतख की सभी प्रजातियां और प्रवासी पक्षी यहां आते हैं।
पक्षियों की गतिविधियों पर रखी जा रही नजर
डीएफओ आकाशदीप बधावन ने बताया कि सभी झील, नदियों, तालाबों पर प्रवासी पक्षियों पर नजर रखी जा रही है। लोग कहीं भी मृत या बीमार पक्षी देखें तो इनसे दूर रहें और वन विभाग के नंबर 05544-297105 पर सूचित करें। मुर्गी फॉर्म में सफाई रखें, जहां पक्षियों का आगमन होता है उन जलीय स्थलों से भी दूर रहे और पक्षियों के मल की खाद का भी प्रयोग न करें।
प्रभावित क्षेत्र के 10 किमी दायरे में रहेगा अलर्ट
सिद्धार्थनगर। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ज्ञानप्रकाश ने बताया कि बर्ड फ्लू से प्रभावित क्षेत्र (गांव/मोहल्ला) की 10 किमी परिधि के क्षेत्र में एलर्ट जोन होगा। इस क्षेत्र में रहने वाले सभी व्यक्तियों की पूरी पहचान की जाएगी। इस क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए पाबंदियां लगाई जाएगी। पशु चिकित्साधिकारी के नेतृत्व में तहसीलवार गठित टीम पक्षियों की किलिंग, टीकाकरण, निगरानी एवं कुक्कुट प्रक्षेत्रों में साफ-सफाई रखने का निर्देश दिया गया है।
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अंडे और मुर्गे की मीट की दर घटी
बर्ड फ्लू फैलने की आशंका के कारण अंडे और मुर्गे की मीट की दर में गिरावट आयी है। अंडा और मुर्गे के मीट विक्रेता अफजल ने बताया कि बर्ड फ्लू की आशंका के कारण बिक्री कम प्रभावित हुई है, लेकिन दर में कमी आई है। पहले मुर्गे का मीट 200 रुपये प्रति किग्रा था, अब घटकर 170-180 के बीच पहुंच गया है। अगर यह संक्रामक बीमारी फैलने की संभावना बढ़ेगी तो कारोबार प्रभावित हो सकता है।
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