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Siddharthnagar News: पशु तस्करों का लेन बन चुका है इटवा-बांसी मार्ग

Tue, 05 Mar 2024 11:06 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। पशुओं तस्कर के लिए इटवा-बांसी मार्ग चैनल बन चुका है। इस मार्ग पर तस्कर बेखौफ चलते हैं। इनके सामने अगर कोई पड़ जाए तो उसे कुचलने से भी नहीं डरते हैं। लगभग दो माह पहले इसी मार्ग पर बांसी कोतवाली क्षेत्र के बेलबनवा गांव के पास पशु तस्करों ने बाइक सवार को रौंद दिया था। इस हादसे में बाइक सवार दोनों की युवकों की मौत हो गई। इसमें बिहार के पशु तस्करों का गैंग पकड़ा गया था। मंगलवार को पशु तस्करों और पुलिस से हुई मुठभेड़ ने यह पुख्ता कर दिया है कि पशु तस्करी रूकी नहीं है। तस्करों का यह मुख्य केंद्र बन गया है।
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गोल्हौरा थाना क्षेत्र के विशुनपुर गांव के पास सोमवार सुबह भोर में पशु तस्करों का पीछ करने चली पुलिस से तस्करों की मुठभेड़ हो गई। दोनों तरफ से चली गोली में दरोगा सुरेंद्र कुमार सिंह के हाथ में गोली लगी। जबकि पुलिस की जवाबी कार्रवाई में महराजगंज के पशु तस्कर अब्बास के पैर में गोली लगी। मौके से पुलिस ने दो बदमाशों को पकड़ा। इनके कब्जे से तमंचा और कारतूस भी बरामद किया गया। जिस हिसाब से गाड़ी दौड़ा रहे थे, अगर कोई भी सामने से आता तो उसे उड़ाते देर नहीं लगाते। क्योंकि सड़क पर चढ़ने के बाद यह किसी को समझते नहीं है। अभी दो माह पहले इसी मार्ग पर बांसी कोतवाली क्षेत्र के बेलबनवा गांव के पास पशुओं को लादकर लेकर जा रहे तस्करों ने बाइक सवार को उड़ा दिया था।
24 दिसंबर की रात में हुई इस घटना में गोल्हौरा थाना क्षेत्र के महुआ निवासी सोनू गौड़ (26) पुत्र राधेश्याम उसी गांव निवासी अनिल चौधरी (30) पुत्र शिवपूजन की मौत हो गई थी। पुलिस ने घेराबंदी करके दो तस्करों को पकड़ा था। जबकि पशुओं को बगल के गोशाला में भेजवाया था। जांच में पाया गया कि यह बिहार को गिरोह है। इसमें मुनाब अली और अलाउद्दीन अली अरौली दुबौली टोला तकिया थाना गोपालपुर जनपद गोपालगंज बिहार पकड़े गए थे। इनके गिरोह में और लोगों के शामिल होने के बाद सामने आई थी। लेकिन वह पकड़ में नहीं आए थे। मंगलवार को पुलिस से हुई मुठभेड़ ने यह पुख्ता कर दिया है कि पशु तस्कर एक बार फिर सक्रिय हो चुके हैं।
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इतना लंबा है नेटवर्क

पुलिस सूत्रों की माने तो पूर्व में पकड़े गए बिहार गैंग के तस्करों से पूछताछ में यह सामने आया था कि यह गोंडा, बलरामपुर से पशुओं के उठाते हैं। सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, गोरखपुर, कुशीनगर होते हुए बिहार और वहीं से पश्चिम बंगाल और बंग्लादेश भेज देते हैं। इसमें बड़ा लंबा चैनल काम करता है।
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