बैंक के बाहर लगी भीड़, फाइल फोटो
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आमतौर पर सिद्धार्थनगर को पिछड़ा जिला माना जाता है। यहां बड़े उद्योग नहीं है, रोजगार के पर्याप्त साधन नहीं है। खेती मुख्य पेशा है। मगर नोटबंदी के बाद लोगों के घरों की करेंसी जब बैंकों में पहुंचना शुरू हुई तो हर कोई हैरान रह गया है। पिछले एक सप्ताह में विभिन्न बैंक शाखाओं में सौ करोड़ से अधिक की राशि जमा हो चुकी है। तीन दिन पहले 40 करोड़ रुपये के दो हजार के नोट आए थे, यह भी राशि अब खत्म होने की ओर है। कुछ बैंकों में नो कैश की नोटिस चस्पा हो गई है तो कई बैंकों ने बाहरी खातों वालों का कैश बदलने से इनकार कर दिया है। लोग जहमत झेल रहे हैं। कतारों में पूरा दिन बीता रहे हैं, बावजूद उनकी हसरत पूरी नहीं हो रही। बैंक प्रबंधन भी लाचार हो गया है। अधिकारी व्यवस्था को दोष देते हुए हाथ खड़े कर रहे हैं।
बुधवार को भी करेंसी का करंट लोगों में तेजी से दौड़ता रहा। नगर के एसबीआई मुख्य शाखा में सुबह 6 बजे से कतार लगने लगी थी। आठ बजे तक यहां करीब 100 लोग नंबर लगा चुके थे। कुछ ऐसा ही हाल विकास भवन शाखा का भी रहा। बैंक खुलने से पहले ही नोट बदलने के लिए हाजिर थे। सेंट्रल बैंक व एचडीएफसी शाखा में भी कतार लंबी थी। महाराष्ट्रा बैंक, पीएनबी सहित अन्य बैंकों में सिर्फ नोट जमा हो रहे थे। केनरा बैंक उन्हीं लोगों के नोट बदल रहा था, जिनके खाते उनके पास थे। सिंडीकेट बैंक में नकदी खत्म हो चुकी थी। डाकघर में भी सिर्फ पैसा जमा हो रहा था। यहां अब तक नकदी बदलने की प्रक्रिया शुरू ही नहीं हुई है। सुबह से ही कतारों में खड़े लोग इस व्यवस्था से आजिज दिखे, मगर लोगों की परेशानियां दरकिनार कर डाककर्मी काउंटर बंद कर अंदर बैठे रहे। जलालतों का सिलसिला पूरे दिन जारी रहा। नकदी न मिलने से मायूस लोग घंटों इंतजार के बाद निराश लौटे। लीड बैंक के सहायक प्रबंधक भूपेंद्र सिंह के मुताबिक 40 करोड़ रुपये की नई करेंसी जिले में अब तक आई है, जिसका सभी बैंकों में वितरण किया गया है। अतिरिक्त करेंसी के लिए लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। एक-दो दिनों में यह पैसा भ आने की उम्मीद है।