गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है। अप्रैल में ही पारा 42 के पार पहुंच गया है। गर्म हवा के थपेड़ों और आसमान से बरसते अंगारे अभी से जून की याद दिला रहे हैं। ताल-तलैया सूखने के बाद लोगों का बुरा हाल है। जलस्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है। पेयजल की किल्लत गहरा रही है। मौसम के यह तेवर देख लोग यह चिंतित हैं कि अभी यह हाल है तो आगे क्या होगा।
अप्रैल का महीना गर्मी की शुरुआत का माना जाता रहा है। मगर इस बार स्थिति विपरीत है।
लोगों को अभी से जून की गर्मी याद आ रही है। सुबह आठ बजे की धूप असहनीय हो रही है। दस बजते-बजते सड़कों पर सन्नाटा पसर जा रहा है। स्कूल-दफ्तर सहित अन्य कामों के कारण ही लोग बाहर निकल रहे हैं। वह भी पूरी सावधानी के साथ।
सिर पर गमछा, टोपी रखने के बावजूद तीखी धूप का सामना करने की हिम्मत नहीं हो रही। गर्मी के असर से शीतल पेय पदार्थों की बिक्री बढ़ गई है, वहीं आइसक्रीस, तरबूज, खरबूज, खीरा-ककड़ी को भी लोग खूब पसंद कर रहे हैं। लगातार बढ़ती गर्मी से लोगों के माथे पर बल भी साफ नजर आ रहा है। हिमालय का तराई क्षेत्र होने के बावजूद यहां अप्रैल में ही 42 डिग्री तापमान है तो फिर जून में क्या हाल होगा।