खुनुवां। नेपाल में आगामी चुनाव को अधिक सहभागी, विश्वसनीय और तकनीक-सक्षम बनाने की कवायद शुरू हो गई है। निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार से राजनीतिक दलों के साथ चुनावी तैयारियों को लेकर चर्चा शुरू की। पहले चरण की बैठक में 22 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मतदाता सहभागिता बढ़ाने, अंतर-जिला मतदान की व्यवस्था लागू करने, मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने और चुनाव खर्च कम करने समेत विभिन्न मुद्दों पर सुझाव लिए गए।
आयोग ने कहा कि काम, अध्ययन या अन्य कारणों से अस्थायी रूप से अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर रहने वाले नागरिकों को भी मतदान का अवसर मिलना चाहिए। इसी उद्देश्य से अंतर-जिला मतदान की व्यवस्था विकसित करने की संभावनाओं पर अध्ययन और राजनीतिक दलों से सुझाव लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
आयोग ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को मतदान का अधिकार देता है। ऐसे में मतदान से वंचित रहने वाले मतदाताओं की संख्या कम करना जरूरी है। कार्यक्रम में निर्वाचन आयुक्त डॉ. जानकी कुमारी, निर्वाचन आयुक्त सगनशमशेर जेएनआर, निर्वाचन आयुक्त गुरु प्रसाद बागले, निर्वाचन आयुक्त डॉ. राजिन सुब्बा और आयोग के प्रवक्ता नारायण प्रसाद भट्टराई समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
तकनीक के इस्तेमाल से पहले पर्याप्त अध्ययन पर जोर
बैठक में चुनाव प्रक्रिया में सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। आयोग ने कहा कि चुनाव में नई तकनीक लागू करने से पहले उसका पर्याप्त अध्ययन किया जाना जरूरी है, ताकि चुनाव की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता प्रभावित न हो। इस संबंध में राजनीतिक दलों की सहमति और सुझावों को भी महत्व देने की बात कही गई।
आचार संहिता, चुनाव खर्च और मतदाता शिक्षा पर भी चर्चा
बैठक में चुनाव आचार संहिता को प्रभावी ढंग से लागू करने, चुनाव खर्च कम करने, मतदाता शिक्षा को मजबूत करने और राजनीतिक दलों के वित्तपोषण से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर भी विचार-विमर्श किया गया। मुख्य निर्वाचन आयुक्त मनबहार कार्की ने कहा कि निर्वाचन आयोग और राजनीतिक दलों के आपसी सहयोग से चुनाव प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं में समयबद्ध और लोकतांत्रिक तरीके से सुधार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आयोग को सभी राजनीतिक दलों से अब तक पर्याप्त सहयोग मिला है और आगे भी सहयोग जारी रहने की उम्मीद है।