सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय परिसर में रविवार को आयोजित दो दिवसीय प्रथम प्रबंधन विकास कार्यक्रम के समापन सत्र में कला संकाय एवं छात्र कल्याण की अध्यक्ष प्रो. नीता यादव ने बताया कि नीतियां ऐसी नियोजित होनी चाहिए हैं ताकि धीमी गति से सीखने वालों को भी अंतिम रूप से लाभान्वित किया जा सके।
इस बात पर भी प्रकाश डाला कि समग्र संस्थागत विकास के लिए प्रभावी प्रबंधन और समावेशी शैक्षिक रणनीतियां बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। कार्यक्रम के संयुक्त समन्वयक डॉ. मनीष शर्मा ने कार्यक्रम की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। सत्र में एक फीडबैक और प्रश्नोत्तर सत्र का भी आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रधानाचार्यों ने पूर्व छात्रों की भागीदारी, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के कार्यान्वयन संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर प्रश्न पूछे। सत्र के अंतर्गत विश्वविद्यालय के सिद्धार्थ इंक्यूबेसन फाउंडेशन के समन्वयक डॉ. अखिलेश दीक्षित ने फाउंडेशन के क्रिया-कलापों से प्राचार्यों को अवगत कराया।
सत्र का संचालन कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. शिवम शुक्ला ने किया।
प्राध्यापक प्रकृति राय, डीन, विज्ञान संकाय सहित सभी संकाय सदस्य, प्रो. हरीश कुमार शर्मा, प्रोफेसर सत्येंद्र कुमार दुबे, डॉ. विशाल गुप्ता, डॉ. कपिल गुप्ता कार्यकम में शामिल हुए। यह जानकारी पीआरओ डॉ. अविनाश प्रताप सिंह ने दी।