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Siddharthnagar News: पढ़ाई से बदल रही बेटियों की राह... गांवों में बढ़ी नई उम्मीद

Sat, 30 May 2026 02:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। जिले के गांवों में बेटियों की शिक्षा को लेकर परिवारों की सोच तेजी से बदल रही है। पहले जहां लड़कियों की पढ़ाई प्राथमिक स्तर तक सीमित रहती थी। वहीं, अब ग्रामीण परिवार उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार को ध्यान में रखकर बेटियों की पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। परिवहन, छात्रावास और कोचिंग सुविधाओं के विस्तार के साथ गांवों की बेटियां अब बड़े शहरों की तरह कॅरिअर बनाने का सपना देख रही हैं।
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जिले के कई गांवों में छात्राएं अब प्रतियोगी परीक्षाओं, ऑनलाइन कोर्स और स्कॉलरशिप योजनाओं का लाभ लेकर आगे बढ़ रही हैं। अभिभावक भी बेटियों की शिक्षा को खर्च नहीं बल्कि भविष्य का निवेश मानकर संसाधन जुटा रहे हैं।
नौगढ़ क्षेत्र की दिशा यादव ने बताया कि पहले गांव की लड़कियों के लिए इंटर के बाद पढ़ाई जारी रखना मुश्किल माना जाता था, लेकिन अब परिवार खुद आगे बढ़कर सहयोग कर रहे हैं। शोहरतगढ़ क्षेत्र के विकास सिंह ने बताया कि बेटियों की पढ़ाई को लेकर अब लोगों की सोच बदली है। परिवार चाहते हैं कि लड़कियां आत्मनिर्भर बनें और नौकरी कर अपने पैरों पर खड़ी हों।
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शिक्षकों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में छात्राओं की संख्या लगातार बढ़ी है। खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाली ग्रामीण छात्राओं में उत्साह बढ़ा है। कई छात्राएं पुलिस, शिक्षक भर्ती, बैंकिंग और अन्य सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रही हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद कुमार का कहना है कि शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता ने बाल विवाह जैसी समस्याओं पर भी असर डाला है। अब परिवार बेटियों की पढ़ाई पूरी कराने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
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इसलिए बदल रही बेटियों की राह
- प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के प्रति बढ़ी जागरूकता
- ऑनलाइन पढ़ाई और डिजिटल संसाधनों की आसान पहुंच
- स्कॉलरशिप और सरकारी योजनाओं का बढ़ा असर
- परिवहन, छात्रावास और कोचिंग सुविधाओं का विस्तार
- ग्रामीण परिवारों की सोच में आया बदलाव
- परिवार अब उच्च शिक्षा पर ज्यादा खर्च करने को तैयार
- गांवों से शहरों तक बढ़ी छात्राओं की आवाजाही

बोले अभिभावक
पहले बेटियों की पढ़ाई को लेकर लोग ज्यादा गंभीर नहीं होते थे, लेकिन अब समय बदल रहा है। परिवार चाहते हैं कि बेटियां पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनें।
- रामलाल चौधरी, अभिभावक

ऑनलाइन पढ़ाई और कोचिंग सुविधाओं से गांव की लड़कियों को भी आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है। अब बेटियां भी बड़े सपने देखने लगी हैं।
- सीमा देवी, अभिभावक
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