गाय का गोबर और दूध दोनों उपयोगी : डॉ. बलराम
पकड़ी बाजार। गोवंश प्रकृति का वरदान हैं। इन्हें किसी भी दशा में बेसहारा नहीं छोड़ा जाना चाहिए। गाय का गोबर और दूध दोनों उपयोगी है। यह जानकारी पशुचिकित्साधिकारी जोगिया डॉ. बलराम चौरसिया ने शनिवार को गायघाट में आयोजित पशुपालक गोष्ठी में दी।
उन्होंने कहा कि मानव के लिए कल्याणकारी होने के कारण हमारे देश में बहुत पुराने समय से ही गाय को गो माता कहा जाता है। गाय के दूध के साथ-साथ गोबर व मूत्र में भी औषधीय गुण पाए जाते हैं। मानव के लिए अत्यंत उपयोगी होने साथ साथ पर्यावरण के संतुलन में भी गोवंश की अहम भूमिका होती है। बदलते परिवेश में गोपालन के प्रति लोगों का रुझान कम हो रहा है। बढ़ते मशीनीकरण के चलते नर गोवंशों की महत्ता में कमी होने से वे अनुपयोगी हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अज्ञानता, उदासीनता व संवेदनहीनता के कारण गोमाता के प्रति कुछ लोगों का व्यवहार ठीक नहीं है। जब तक गाय से दूध मिलता है, उन्हें रखते हैं। दूध मिलना बंद होने पर बेसहारा छोड़ देते हैं। जिसके दूध का सेवन किया, उसकी सेवा के बजाय बेसहारा छोड़ना एक प्रकार का पाप है। विषमुक्त फसल के लिए उपयोगी गोबर के लिए भी गोपालन नितांत आवश्यक है। इस दौरान प्रधान पवन कुमार, हरिश्चंद्र, अनिल, रमाकांत, जगदीश, बनारसी, कलावती, सीताराम, किशलावती, व रामजीत आदि पशु पालक मौजूद रहे।