सिद्धार्थनगर। स्कूलों और कोचिंग संस्थानों के आसपास पनपता नशे का कारोबार अब समाज और व्यवस्था, दोनों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और सपने होने चाहिए, उस उम्र में उनके सामने नशे की पुड़िया आसानी से पहुंच रही है।
कमजोर निगरानी, प्रशासनिक लापरवाही और मुनाफाखोर तंत्र ने मासूम भविष्य को अंधेरे की ओर धकेल दिया है। अब शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे में तंबाकू और नशीले पदार्थों की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
मगर जब जनपद के बाजार और कस्बों की पड़ताल की गई तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आईं। जहां सिर्फ कलम कॉपी और टॉफी बिस्कुट मिलने चाहिए, वहां इन सामानों के साथ तंबाकू से जुड़े उत्पाद की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही थी। पड़ताल में सामने आया कि सरकार ने दायरा 500 मीटर तय किया है, लेकिन स्कूल-कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों के महज 50 से 100 मीटर के दायरे में ढेरों दुकानों का संचालन किया जा रहा था। बिक्री के बारे में जानकारी ली गई तो तंबाकू उत्पादों पर बढ़े टैक्स का असर अदना सा लगा।
दुकानदारों के मुताबिक टैक्स बढ़ने के बाद भी हर साल 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। वहीं, नशे से प्रभावित होकर बीमार हो रहे लोगों की जानकारी लेने पर मेडिकल कॉलेज में हर माह 25 से 30 नए मरीज मिलने की बात सामने आई है, जो गंभीर नशे के आदी हैं। इस लत को छुड़ाने के लिए परिवार समय और पैसा दोनों बर्बाद कर रहे हैं। दवा के साथ कई माह तक काउंसिलिंग करनी पड़ रही है, फिर भी लत पूरी तरह छूटने में काफी समय लग रहा है।
स्कूलों के पास दुकानों की भरमारशैक्षिक संस्थानों के आसपास ऐसी दुकानों के बारे में जानकारी लेने के लिए संवाद न्यूज एजेंसी की टीम पहले जनपद मुख्यालय के जीजीआईसी गली के पास पहुंची। यहां तीन बड़े विद्यालय सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, सिंहेश्वरी इंटर कॉलेज और जीजीआईसी व एक अन्य निजी विद्यालय है।
हजारों की छात्र संख्या वाले इन विद्यालयों की 500 मीटर की परिधि के दायरे में 8-10 पान मसाले की दुकानें हैं। इसी प्रकार स्टेशन रोड वाले मार्ग पर अंदर गली में संचालित इंटर कॉलेज वाले मार्ग पर भी ऐसे ही हालात दिखे। वहीं, डुमरियागंज कस्बे के दो इंटर कॉलेज के आसपास के हालात देखे गए तो यहां एक स्कूल की दीवार पर ही पान मसाले की दुकानें सजी नजर आई। खाने-पीने के साथ वहां तंबाकू से जुड़े उत्पाद की बिक्री धड़ल्ले से बिक्री की जा रही थी।
वहीं, शोहरतगढ़ इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेज के मार्ग पर पहुंची टीम को गुटखे की दुकानें संचालित होती मिलीं। वहीं, बांसी तहसील मुख्यालय स्थित कई सरकारी और निजी स्कूल-कॉलेज पड़ते हैं, जिसके आसपास तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट एवं गुटका की दुकानें लगती है। बांसी नगर पालिका अंतर्गत 15 से 20 सरकारी और निजी स्कूल-कॉलेज पड़ते हैं। सरकारी में रतन सेन इंटर कॉलेज, रतनसेन डिग्री कॉलेज, तिलक इंटर कॉलेज, कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय शीतलगंज, राजकीय गर्ल्स इंटर कॉलेज शामिल है जो सड़क से सटे हैं।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज का नशामुक्ति केंद्र वार्ड करीब दो साल पहले ही शुरुआत थी। यहां काउंसिलिंग के साथ ही जांच और दवा की सुविधा है। विशेषज्ञों की टीम के साथ स्टाफ काम करता है।
यहां ओपीडी में हर माह 25-30 नए मरीज आते हैं। इसमें हेरोइन, शराब, इंजेक्शन, गांजा और सिगरेट का नशा करने वाले शामिल होते हैं। इनकी काउंसिलिंग के साथ-साथ दवा भी दी जाती है। पिछले दो वर्षों में नशा मुक्ति केंद्र पर 589 मरीज पहुंच चुके हैं। इसमें 484 मरीजों को नियमित दवा दी जा रही। इसके अलावा टीम की ओर से हर माह कैंप आयोजित करके दो साल में 2218 लोगों की काउंसिलिंग की जा चुकी है।