सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में नशीली दवाओं का धंधा तेजी बढ़ रहा है। नेपाल से आकर युवा दवाएं खरीद रहे हैं। इसी की नतीजा है कि बॉर्डर पर लगातार दवा की दुकानों में इजाफा हो रहा है। पांच साल में सीमावर्ती क्षेत्र में दो गुना से अधिक दवा की दुकानें खुल गई हैं। एक छोटे से चौराहे पर जहां लोगों का आना-जाना बहुत कम है, वहां भी दुकानें खोल दी गई हैं। सीमा पर नशीली दवाओं की तस्करी हो रही है। इस बात की चर्चा नेपाल में होने वाले भारत-नेपाल समन्वय बैठक में भी नेपाल के अधिकारी कई बार उठा चुके हैं। जिले में लगातार पकड़ी जा रही नशीली दवाएं इसी बात की पुष्टि कर रही हैं कि दवाओं की तस्करी बढ़ी है। एक दिन पहले सीमा से सटे ककरहवा व अन्य कस्बों में ड्रग विभाग की टीम ने छापा मारा। कुछ स्थानों पर दवा से संबंधित कागजात ही नहीं मिले तो कुछ स्थानों पर संदिग्ध दवाएं मिलीं। एक जांच एजेंसी की ओर से नशीली दवाओं की बिक्री होने से संबंधित सूचना दी गई थी, तब यह कार्रवाई की गई।
-
आबादी नहीं, फिर भी तेजी से बढ़ रही दुकान
अलीगढ़वा क्षेत्र के निवासी वजहुल ने बताया कि ऐसे स्थान पर दवा की दुकानें खोल दी गई हैं, जहां दूर-दूर तक गांव नहीं है। लेकिन दुकान से कमाई करके जमीन खरीद रहे हैं, मकान बनवा रहे हैं। नेपाल में दवा की कीमत अधिक है। कई दवाएं प्रतिबंधित हैं, इसलिए नेपाल सीमा से सटे गांव के लोग यहीं पर आते हैं और मुंह मांगी कीमत पर दवा लेकर जाते हैं।
-
सिरप सहित कई भारतीय दवाओं की मांग अधिक
नेपाल में भारतीय कफ सिरप की मांग अधिक रहती है। इसके साथ ही खुजली में खाने वाली एविल और सिट्राजिन दवाओं की मांग अधिक रहती है। सस्ता होने के साथ ही इससे नींद भी आती है। खांसी आने पर सिट्राजिन का प्रयोग नेपाल में अधिक होता है। इसके अलावा अन्य कई दवाएं हैं, जिससे नशा होता है, उसे खरीदते हैं।
-
नेपाल सरकार ने किया है प्रतिबंधित
नेपाल स्पासमों प्राक्सीवान, फैंसीड्रील कफ सिरप, कोरेक्स कफ सिरप, न्यूट्रोसन, अलप्राजोलाम, लेमोफेन, लेमोटिल, क्लमपोज सहित कई नारकोटिक दवाएं पूर्ण रूप से प्रतिबंधित हैं। जिन्हें नेपाल सरकार ने रोका है। लेकिन बाॅर्डर से यह दवाएं लगातार नेपाल में बिक्री की जा रही हैं।
-
दोगुना दाम पर बिक रही प्रतिबंधित दवाएं
नेपाल में दवा की दुकान करने वाले संदीप पांडेय के मुताबिक चोरी छिपे भारत से कफ सिरप आती हैं। जिसका मूल्य 130 रुपये है यहां वह 200 रुपये तक मिलता है। इसी प्रकार नशीली गोली जो 30 रुपये पत्ता बिकती है, उसकी कीमत 30 रुपये गोली में लोग बेच रहे हैं। प्रतिबंधित होने के बाद भी लगातार नेपाल में दवाएं पहुंचती हैं, जिस आए दिन पकड़ जा रहा है। इसमें कुछ इंजेक्शन भी आ रही हैं।
-
इस क्षेत्र में बढ़ी इतनी दुकानें
जिले की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल से लगती है। जानकारी के अनुसार, पांच साल में खुनुवां बाॅर्डर से लगने वाली क्षेत्र में 20 मेडिकल स्टोर और क्लीनिक खुले थे। अब उसकी संख्या बढ़कर 40 से अधिक हो गई है। इसी प्रकार बढ़नी क्षेत्र में 16 किलोमीटर के क्षेत्र में दोगुनी दुकान हो गई हैं। कमोबेश अलीगढ़वा और ककरहवा बाॅर्डर क्षेत्र में इतनी ही दुकानों में इजाफा हुआ है, जिसके पास एक दुकान थी, वह अब दो और तीन दुकान खोल लिए हैं।
-
नेपाल के अधिकारी उठा चुके हैं सवाल
भारत-नेपाल समन्वय समिति की बैठक में हर बार नेपाल के अधिकारी भारत से प्रतिबंधित दवाएं पहुंचने की बात उठाते हैं। इसकी रोकथाम पर काम करने की बात करते हैं। एक साल पहले नेपाल में हुई बैठक में जिलाधिकारी के समक्ष नेपाल के अधिकारी ने बात उठाई और कहा कि बाॅर्डर से आए दिन लाखों की प्रतिबंधित नशीली दवाएं पहुंच रही हैं। इस पर रोक लगाया जाना बहुत ही जरूरी है।