सिद्धार्थनगर। बाॅर्डर पर कोडीनयुक्त कफ सिरप की बरादमगी और नेपाल से तस्करी का कनेक्शन उजागर होने के बाद दवाओं की हेराफेरी की जड़ें काफी गहरी हैं। भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में नशीली दवाओं का धंधा तेजी बढ़ रहा है। हर बार बाॅर्डर पर पकड़ी जा रही नशीली गोली हो या फिर दवाओं का गत्ता, इसका नेपाल से कनेक्शन जरूर जुड़ा मिल रहा है। बाॅर्डर इलाके में छिटपुट बरामदगी और गिरफ्तार किए गए तस्करों से मिले इनपुट के आधार पर नेपाल में दवाओं की तस्करी का संगठित गिरोह के सक्रिय होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। सुरक्षा एजेंसियां भी इन्हीं बिंदुओं को ध्यान में रखकर कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी के सिंडिकेट को तोड़ने की जुगत में लगीं हैं। कोडीनयुक्त कफ सिरप की बरामदगी के बाद नेपाल से लगने वाली 68 किलोमीटर सीमा पर दवाओं का धंधा तेजी से बढ़ा है। ककरहवा और खुनुवां बाॅर्डर से जुड़े सूत्र बताते हैं कि सीमावर्ती इलाके की दवा की दुकानें नेपाल के युवाओं के भरोसे ही चल रही है। नेपाल से आकर युवा दवाएं खरीद रहे हैं। इसी का नतीजा है कि बॉर्डर पर लगातार दवा की दुकानों में इजाफा हो रहा है। सूत्रों का कहना है कि बीते पांच साल में सीमावर्ती क्षेत्र में दोगुना से अधिक दवा की दुकानें खुल गई हैं। एक छोटे से चौराहे पर जहां लोगों का आना-जाना बहुत कम है, वहां भी दुकानें खोल दी गई हैं। हर साल औसतन 10 प्रतिशत दुकानों का इजाफा हो रहा है। ककरहवा बाॅर्डर इलाके रहने वाले रामकेश के मुताबिक मुख्य चौराहे को छोड़ दें छोटे चौराहे पर नशे की धंधा चल रहा है। अकसर देखा जाता है कि नेपाल से बाइक से साइकिल से लोग आते हैं। दुकान पर बैठते हैं। इसके बाद दुकानदार गोली देते हैं और पानी लेकर पीकर वे निकल जाते हैं। कुछ तो नशीली दवाओं का पत्ता लेते हैं जो नेपाल में बिना डॉक्टर के पर्चे के नहीं दी जा सकती है। उसे बेधड़क बेचा जा रहा है। वहीं, पूर्व में दवाओं के साथ पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ और जांच में यह सामने आ चुका है कि जितने में भारत में दवा का एक पत्ता मिल जाता है, उतने में वहां एक गोली की कीमत वसूल की जा रही है। कुल मिलाकर देखा जाए तो यहां की दुकानें नेपाल से आने वाले मरीजों और नशे के दलदल में फंस चुके युवाओं के बल पर ही संचालित की जा रहीं हैं। बाॅर्डर इलाके की दुकानों की जांच में दवाओं में अनियमितता की बात सामने भी आ चुकी है। बाॅर्डर इलाके से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर जांच का दायरा बढ़े तो बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित दवा और कप सिरप बरामद हो सकती है।
आबादी नहीं, फिर भी तेजी से बढ़ रही दुकान : सीमा पर लगातार दवाओं की दुकानों की संख्या में इजाफा हो रहा है। यह तब है जहां कोई बड़ी आबादी भी नहीं है। वहां पर संचालित होने वाले मेडिकल स्टोर के बारे में जानकारी ली गई तो अलीगढ़वा क्षेत्र के निवासी इब्राहीम ने बताया कि ऐसे स्थान पर दवा की दुकानें खोल दी गई हैं, जहां दूर-दूर तक गांव नहीं है, लेकिन दुकान से कमाई कर धंधेबाज जमीन खरीद रहे हैं। मकान बनवा रहे हैं। नेपाल में दवा की कीमत अधिक है। कई दवाएं प्रतिबंधित हैं, इसलिए नेपाल सीमा से सटे गांव के लोग यहीं पर आते हैं और मुंह मांगी कीमत पर दवा लेकर जाते हैं। मधेस के लगभग 20 किलोमीटर तक के दायरे में रहने वाली नेपाली नागरिक यहीं से दवा लेते हैं। खास बात यह है कि यहां बिना टैक्स या बिल के आसानी से दवाएं मिल जातीं हैं। यह वजह है कि लगातार दुकानों की संख्या बढ़ रही है। यह हाल केवल अलीगढ़वा क्षेत्र का नहीं है बल्कि यह 68 किलोमीटर सीमा पर है। सिरप सहित कई भारतीय दवाओं की मांग अधिक : नेपाल में भारतीय कफ सिरप की मांग अधिक रहती है। इसे युवा नशे के लिए इस्तेमाल करते हैं। यह दवाएं नेपाल में अधिक मूल्यों पर मिलती हैं, जबकि बॉर्डर पर दोगुनी-तिगुनी कीमत वसूलने के बाद भी नेपाल से कम कर पर यह दवा मिल जाती है। इसलिए तस्कर छोटी- छोटी खेप में इसे लेकर जाते हैं। इसके साथ ही खुजली में खाने वाली एविल और सिट्रिजिन दवाओं की मांग अधिक रहती है। सस्ती होने के साथ ही इससे नींद भी आती है। खांसी आने पर सिट्रिजिन का प्रयोग नेपाल में अधिक होता है। इसके अलावा अन्य कई दवाएं हैं, जिससे नशा होता है, उसे खरीदते हैं।