अधर में पेयजल परियोजना, सीएम का फरमान, अब तेजी से होगा काम
जिले में जल जीवन मिशन के तहत 600 परियोजना पर चल रहा काम
मार्च माह में पूरा करने का था निर्देश, दिसंबर तक बढ़ा है तिथि
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट जल जीवन मिशन की जिले में बेहद खराब प्रगति है। अधूरे पड़े छह सौ से अधिक प्रोजेक्ट से ग्रामीणों को सांसत झेलनी पड़ रही है। कई जगह पर 70 फीसदी से अधिक काम बाकी है और कहीं पाइप डालने के लिए सड़क खोदकर छोड़ दिया गया है। जबकि कार्य पूर्ण करने की निर्धारित अवधि में मात्र चार माह शेष बचा है। मुख्यमंत्री ने दो पहले लखनऊ में समीक्षा बैठ कर परियोजना को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए हैं, जिससे योजना में तेजी आने का उम्मीद है।
जनपद में कार्यदायी संस्था मेघा के 176, जैक्शन के 423 है जिसमें 393 पर कार्य चल रहा है, एससीएल के 163 प्रोजेक्ट है। इन सभी के कार्य पूर्ण करने की अवधि एक वर्ष थी। सभी संस्थाओं द्वारा कार्य अब तक पूर्ण नहीं कर पाने पर शासन ने छह माह की अवधि और बढ़ाई है जो दिसंबर 2024 तक पूर्ण हो जायेगा। मुख्यमंत्री के प्राथमिकता वाले इस कार्य के पूर्ण करने के लिए शासन स्तर से लगातार निगरानी की जा रही है। वहीं अभी तक इनमें अधिकांश प्रोजेक्ट अधूरे हैं। जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर के गांवों के निरीक्षण में भी शिकायत मिली कि पाइप जमीन में डालते समय गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं और इंटरलाॅकिग सड़कों को भी खोद दिया गया है।
जांच के लिए गठित होगी टीम
डीएम ने जनपद स्तर पर जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी को निर्देश दिया कि 10 बिंदुओं का कार्य सत्यापन के लिए अधिकारियों की टीम बनाकर जल जीवन मिशन योजना के कार्यों का सत्यापन कराया जाए। उन्होंने खोदी गई सड़क को गुणवत्तापूर्ण तरीके से मरम्मत कराने का निर्देश दिया। साथ ही सभी कार्यदायी एजेंसियों को मैनपावर बढ़ाकर निर्धारित अवधि में गुणवत्तापूर्ण कार्य कराने का निर्देश दिया।
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प्रत्येक 15 दिन पर होगी समीक्षा
जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर ने इस संबंध में बैठक करके सभी कार्यदायी संस्थाओं के प्रोजेक्ट मैनेजरों को निर्देश दिया कि अपने-अपने लक्ष्य के सापेक्ष कार्य में प्रगति लाकर लक्ष्य का प्रतिशत बढ़ाए। यह सरकार की प्राथमिकता की योजना है। प्रत्येक माह में 15 दिन के अंतराल पर वह स्वयं प्रगति की समीक्षा करेंगे। उन्होंने शत-प्रतिशत पूर्ण होने पर ग्राम पंचायत कमेटी को हैंडओवर किया जाएगा। 10 वर्षों तक देखरेख एवं संचालन एजेंसी द्वारा किया जाएगा।