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Siddharthnagar News: प्रदूषण मुक्त इलेक्ट्रिक सिटी का सपना टूटा

Sat, 02 Mar 2024 12:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। जिले के इलेक्ट्रिक सिटी बनाने की योजना को बड़ा झटका लगा है। नौ हजार करोड़ रुपये की लागत से लगने वाले सोलर पैनल से बिजली उत्पादन करने का सपना टूट गया। आठ हजार एकड़ भूमि की जरूरत थी। जमीन नहीं मिलने के कारण निवेशक सोनभद्र चला गया। हालांकि विभागीय लोगों का कहना है कि उनकी टीम की जांच में यहां की भूमि उपयोगी नहीं थी। जबकि सोनभद्र उन्हें उपयोगी भूमि दिखा और वह चले गए। इस प्रोजेक्ट के जाने से जहां प्रदूषण मुक्ति इलेक्ट्रिक के सपने को झटका लगा। वहीं, रोजगार का बड़ा अवसर हाथ से निकल गया।
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गैर प्रांतों के लिए में रोजगार के लिए पलायन करने वालों को जनपद में ही रोजगार का अवसर मिले। घर पर रहकर अच्छी कमाई कर सके और पलायन रुके। इसके लिए प्रदेश सरकार ने उद्योग को बढ़ावा देने की कवायद शुरू की। एक वर्ष पहले इन्वेस्टर समिट का आयोजन किया गया। इसमें हर जनपदों में उद्योग लगाने के लिए पूंजीपतियों को आमंत्रित किया गया। कंपनी, फैक्टरी सहित अन्य उद्योग लगाने के लिए निवेश के ओएमयू पर हस्ताक्षर कराया गया था। इसमें निवेशक का सहयोग प्रशासन को करना था। उन्हें उपयोग के अनुरूप जमीन उपलब्ध कराना था।
इसमें दिल्ली में रहने वाले दक्षिण भारत के उद्योगपति एसडी विजयन ने इलेक्ट्रिक सिटी बनाने की इच्छा जाहिर करते हुए नौ हजार करोड़ का ओएमयू पर हस्ताक्षर किया था। उन्हें विद्युत उत्पादन के लिए आठ हजार एकड़ भूमि की जरूरत थी। एक साल चले कागजी कार्रवाई के बाद जमीन नहीं मिली तो निवेशक सोनभद्र चले गए। इससे इलेक्ट्रिक सिटी और प्रदूषण मुक्त बिजली उत्पादन के सपने को बड़ा झटका लगा है। हालांकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि निवेशक की टीम ने जांच की। उन्हें यहां की जमीन उपयोगी नजर नहीं आई और सोनभ्रद चले गए।
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दो हजार मेगावॉट बिजली उत्पादन का था लक्ष्य

निवेशक का लक्ष्य था कि आठ हजार एकड़ में लगने वाले इस सोलर प्लांट से दो हजार मेगावॉट बिजली का उत्पादन होता। जो पूरे जनपद को आपूर्ति के साथ पड़ोसी जनपद में भी कुछ इलाकों में आपूर्ति होती।

प्रदूषण मुक्त बिजली आपूर्ति होती

इस बिजली उत्पादन केंंद्र के लगने से प्रदूषण मुक्त जनपद बनने की दिशा में बड़ा कदम था। क्योंकि यहां कोयला लगता नहीं, इसलिए प्रदूषण नहीं फैलता। साथ ही ईधन का प्रयोग नहीं होता। जब लोकल में बिजली आपूर्ति होती तो कास्ट कम पड़ता, लोगों को निर्बाध बिजली मिलती। जब बिजली व्यवस्था बेहतर होती तो और उद्योग और कारखाने लगते और लोगों को रोजगार मिलता।

एक हजार लोगों को मिलता रोजगार

इस बिजली प्लांट के लगने से एक हजार रोजगार पैदा होने का अनुमान था। अगर प्लांट लगता तो एक हजार लोगों को आसानी से रोजगार मिल जाता और उन्हें दूसरे प्रांतों में पलायन नहीं करना पड़ता। निवेशक के जाने से बड़ा झटका लगा है।

गैर प्रांत में रहते हैं जनपद के इतने लोग

जिले की आबादी तकरीबन 29 लाख पहुंच गई है। जिले में उद्योग का कोई बड़ा केंद्र नहीं है। इसलिए दिल्ली, मुंबई, गुजरात, केरला, तमिलनाडू, पंजाब, हरियाणा आदि शहरों में लोग जाते हैं। कोरोना काल में प्रशासन की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक करीब ढ़ाई लाख लोग रोजी रोजगार के सिलसिले में गैर प्रांतों में जाते हैं। इस पलायन को रोकने के लिए बड़े उद्योग की जरूरत है, जो जनपद में नहीं है।

जिले में कोई बड़ा उद्योग नहीं है, इसलिए गैर प्रांत में पलायन करना पड़ता है। अगर जनपद में उद्योग लगता तो घर के पास ही रोजगार मिलता। इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

-विशाल, युवा

जिले में कहीं कोई ऐसी कंपनी और फैक्टरी नहीं है। इसलिए बड़ी संख्या में लोगों को कमाने के लिए बाहर जाना पड़ता है। कई निवेशक आए थे, उद्योग लगने की बात हो रही है।

-नवल जायसवाल, युवा

सोलर से बिजली उत्पादन के लिए नौ हजार करोड़ के ओएमयू पर हस्ताक्षर करने वाले निवेशक ने अपनी इंटरनल टीम से जिले में सर्वे करवाया था। टीम को यहां के बजाए सोनभद्र उपयोगी लगा। इसलिए वह अपना प्रोजेक्ट वहीं लेकर चले गए। यहां से उनका पूरा सहयोग किया जा रहा था।
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-दयाशंकर सरोज, उपायुक्त जिला उद्योग केंद्र सिद्धार्थनगर
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