सिद्धार्थनगर/बांसी। जिले में नदियों का जाल फैला है। नेपाल से निकलने वाली नदियों के पानी से नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। मगर बांध की मरम्मत सिर्फ कागजी दावों तक सिमट कर रह गई है। ऐसे में ग्रामीण एक बार फिर बाढ़ की दहशत से सहमने लगे हैं।
नदी किनारे बसे लोगों को बाढ़ की त्रासदी, फसल और गृहस्थी का सामान नष्ट होने की चिंता सताने लगी है। यही हाल बीडी बांध का है। गैप भरने का काम प्रस्ताव तक सिमटकर रह गया। बांसी तहसील क्षेत्र के राप्ती नदी के उत्तरी पश्चिमी तट पर बने बीडी बांध के गैप का निर्माण न होने से तीन दर्जन से अधिक गांव के लोग बाढ़ की विभिषिका झेल रहे हैं। इन गैप से आने वाले पानी से काफी गांव मैरुंड हो जाते हैं। इसके साथ ही बांसी-इटवा सड़क, जिग्निहवा-चेतिया मार्ग, जिग्निहवा-गोठवा मार्ग सहित क्षेत्र की कई सड़कों पर आवागमन ठप हो जाता है। यही नहीं लोग घर में कैद होते ही हैं, इनके सामने रोजी-रोटी की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है। तैयार फसल बर्बाद हो जाती हैं, जिससे पशुओं के चारे का संकट भी उत्पन्न हो जाता है। तीन वर्ष पूर्व इस बांध में स्थित गैप से आने वाले नदी के पानी ने भीषण तबाही मचाई थी। इसके बाद भी विभाग के जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। हालत यह है कि बरसात शुरू होने से लोगों की चिंता बढ़ गई है।
बाढ़ की विभीषिका से बचाने के लिए बांसी-डुमरियागंज बांध का निर्माण तीन दशक पूर्व कराया गया था। बांध में बिमौवा-मगरगाहा के बीच एक किलोमीटर व रमटिकरा से महुआ पाठक के बीच दो किलोमीटर गैप होने के कारण इसका निर्माण निरर्थक साबित हो रहा है। हालत यह है कि वर्ष 2022 की बाढ़ में इन गैप से आए पानी से 50 से अधिक गांव जलमग्न हो चुके हैं। ग्रामीण रात मूरत, दिनेश, गोलू, मोनू आदि ने बताया कि गांव व घर में पानी भर गया था। किसानों की पूरी फसल बर्बाद हो गई। एक महीने तक लोगों को घर से निकलने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ा। पशुओं के समक्ष चारे का संकट उत्पन्न हो गया। लोगों को संक्रामक रोगों ने भी घेर लिया। बाढ़ से मिली असीम पीड़ा के बाद भी जिम्मेदारों ने सुधि नहीं ली और बांध में बने गैप को भरने का काम नहीं हुआ है।