सिद्धार्थनगर। संतकबीरनगर के बखिरा में डीजे की तेज आवाज से बेकरी संचालक के पिता की मौत हो गई। बरात के दौरान डीजे के शोर से उनकी तबीयत बिगड़ी। इलाज के मेडिकल कॉलेज गोरखपुर ले जाने के दौरान मगहर में उनकी मौत हो गई।
शादी-ब्याह के सीजन में शहर और आसपास के कस्बों में डीजे और बैंड-बाजे की तेज आवाज बुजुर्गों और बीमार नागरिकों के लिए गंभीर खतरा बन गई है। मैरिज हॉल से गुजरने वाली बरातों में कर्कश ध्वनि और तेज डीजे की आवाज से घरों में रहने वाले बुजुर्ग और कमजोर दिल वालों की धड़कन बढ़ जा रही है। वहीं, स्वास्थ्य संबंधी समस्या से जूझ रहे लोग काफी असहज महसूस कर रहे हैं।
स्थानीय निवासी साधना पांडेय ने बताया कि बरात के दौरान डीजे और बैंड का शोर इतना ज्यादा होता है कि घर के अंदर रहने के बाद भी कलेजा हिल जाता है। कमजोर दिल वाले और बीमार लोग तो डर के मारे चैन से नहीं रह पा रहे हैं। इससे उनका रक्तचाप बढ़ जाता है और हृदयाघात का खतरा बढ़ जा रहा है।
शास्त्री नगर निवासी मिठाई लाल कहते हैं कि शादी-ब्याह के जश्न में लोग दूसरों की मजबूरी नहीं समझ रहे हैं। बिना किसी सोच-विचार के डीजे और बैंड बाजा इतनी तेज आवाज में बजाते हैं कि बुजुर्ग और बीमार लोग रात में नींद भी नहीं ले पा रहे। इससे बेचैनी और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ रही हैं।
पुलिस का कहना है कि मैरिज हॉल के आसपास नियमित गश्त बढ़ा दी है और साइलेंस जोन में विशेष निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि बरात के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एएसपी प्रशांत कुमार प्रसाद का कहना है कि डीजे संचालकों को सख्त हिदायत दी गई है कि शादी-ब्याह या किसी पर्व पर तेज ध्वनि में संगीत न बजाएं। यदि ऐसा हो रहा है तो पुलिस तत्काल कार्रवाई करेगी।
50 डेसीबल तक की ध्वनि सहन करने लायक : एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए 50 डेसीबल तक की ध्वनि सहन करने लायक होती है, लेकिन डीजे की ध्वनि की तीव्रता करीब 500 डेसीबल तक पहुंच जाती है। ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. एसएस कन्नौजिया की मानें तो तीव्र ध्वनि की वजह से प्रजनन क्षमता घट जाती है। डीजे की तेज साउंड मस्तिष्क में तनाव पैदा करती है। इससे चिड़चिड़ापन बढ़ता है। रक्तचाप बढ़ जाता है। खून में शर्करा बढ़ने लगती है। हृदय की धड़कन तेज हो जाती है। तेज साउंड के कारण कार्यक्षमता घटती है और एकाग्रता नष्ट हो जाती है। गर्भपात की शिकायत बढ़ती है तथा मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चे पैदा हो सकते हैं। आंखों में जल्द चश्मा तथा एकाग्रता की कमी इसकी प्रमुख वजह है।
वायु और ध्वनि प्रदूषण का स्तर बढ़ा : विशेषज्ञों के अनुसार, मैरिज हॉल के आसपास तेज ध्वनि से न केवल हृदय संबंधी जोखिम बढ़ते हैं बल्कि वायु प्रदूषण भी बढ़ जाता है। बरात के दौरान आतिशबाजी और बारूद से निकलने वाला धुआं वायु की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। शहर के साइलेंस जोन में 40 डेसिबल से अधिक ध्वनि प्रतिबंधित है, लेकिन डीजे और बैंड के शोर से 90-100 डेसिबल तक आवाज बढ़ जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी : हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. राम प्रकाश कहते हैं कि लंबे समय तक तेज आवाज में रहने से वृद्ध और कमजोर दिल वाले लोगों में हृदयाघात, उच्च रक्तचाप और नींद में कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि इस तरह के शोर वाले माहौल में रहने से बचें और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य जांच कराएं।