सिद्धार्थनगर। शादी की खुशियों के बीच डीजे और आतिशबाजी के शोर और धुएं ने लोगों की सेहत पर असर डालना शुरू कर दिया है। डीजे की तेज धमक से जहां लोगों की दुश्वारी बढ़ गई है, वहीं आतिशबाजियों के शोर के साथ उसके धुएं ने लोगों की सेहत खराब कर दी है।सांस लेने में तकलीफ के साथ ही कान में सीटी बजने की शिकायत लेकर मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इतना ही नहीं, इन दिनाें लगातार हो रही बेतहाशा आतिशबाजी से प्रदूषण में भी इजाफा हुआ है और 14 फरवरी को 125 से बढ़कर एक्यूआई का स्तर शनिवार को 190 पहुंच गया है।
शुक्रवार की देर रात एक बरात बीच सड़क पर रुकी और अचानक रॉकेट और बम पटाखों की झड़ी लग गई। कुछ ही मिनटों में इलाके में धुआं-धुआं हो गया। लोग मुंह ढककर किनारे होने लगे और ट्रैफिक थम गया। डीजे और आतिशबाजी का यह कॉम्बिनेशन अब शहर की सड़कों को हर रात ‘बारूद जोन’ में बदल रहा है, जहां एक चिंगारी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। वहीं, लोगों की सेहत पर भी इसका काफी बुरा असर पड़ सकता है।
शनिवार रात स्टेशन रोड, मुख्य बाजार और कलक्ट्रेट मार्ग पर निकली बरातों के दौरान लगातार आतिशबाजी हुई। कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका धुएं से भर गया। दुकानदारों और राहगीरों को सांस लेने में परेशानी हुई और कई लोगों ने मुंह ढककर खुद को बचाने की कोशिश करते नजर आए। बरात गुजरने के बाद भी करीब आधे घंटे तक धुएं की परत बनी रही। जागरूक नागरिक कहते हैं कि शहर में शादी सीजन के साथ बरातों में हो रही आतिशबाजी अब सिर्फ परंपरा नहीं बल्कि सुरक्षा और पर्यावरण दोनों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। संकरी सड़कों और घनी आबादी वाले इलाकों में डीजे के साथ छोड़े जा रहे बम और रॉकेट पटाखे हर रात हादसे का जोखिम बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही हवा में घुल रहा धुआं प्रदूषण स्तर को अचानक बढ़ा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शादी सीजन शुरू होने के बाद यह स्थिति लगभग हर रात देखने को मिल रही है। भीड़ के बीच और बिजली तारों के नीचे छोड़े जा रहे पटाखे कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।
स्थानीय निवासी सीमा सिंह ने कहा, रात में डीजे की तेज आवाज और आतिशबाजी से बच्चे डरकर उठ जाते हैं। बुजुर्गों को सिरदर्द और बेचैनी होने लगती है। बरात गुजरने के बाद भी देर तक धुआं रहता है। मुख्य बाजार के दुकानदार रमेश गुप्ता बताते हैं, पटाखे सीधे दुकान के सामने फूटते हैं। चिंगारी कार्टन पर गिरे तो आग लगने में देर नहीं लगेगी। डीजे की आवाज इतनी तेज होती है कि किसी की चेतावनी भी सुनाई नहीं देती।
पर्यावरण को लेकर सजग डॉ. जीएम शुक्ल बताते हैं कि शादी के पीक दिनों में आतिशबाजी के दौरान शहर का एक्यूआई मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच जाता है। पटाखों से निकलने वाले पीएम 2.5/पीएम-10 कण और सल्फर-नाइट्रोजन गैसें हवा को जहरीला बनाती हैं। दूसरी ओर, डीजे की 200 डेसिबल तक पहुंचती आवाज ध्वनि प्रदूषण की सीमा पार कर जाती है।
पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. संजय मिश्रा कहते हैं, डीजे और पटाखों का एक साथ इस्तेमाल ‘डबल अटैक’ है। एक तरफ हवा खराब होती है, दूसरी तरफ तेज आवाज से मानसिक और शारीरिक असर पड़ता है। यह रिहायशी इलाकों के लिए बेहद खतरनाक है।
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अस्पतालों में बढ़े सांस और घबराहट के मरीज
शादी के सीजन में सांस फूलना, खांसी, सीने में जलन और ब्लड प्रेशर बढ़ने के केस बढ़ जाते हैं। अस्थमा और हार्ट मरीजों के लिए धुआं और तेज आवाज दोनों जोखिम बढ़ाते हैं। उनके मुताबिक, बच्चों और बुजुर्गों पर असर ज्यादा दिखता है।
- डॉ. गौरव दुबे, फिजिशियन मेडिकल कॉलेज
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नियम हैं, पालन कमजोर
सार्वजनिक स्थान पर आतिशबाजी और डीजे के लिए अनुमति और सुरक्षा इंतजाम अनिवार्य हैं। उत्तर प्रदेश फायर एंड इमरजेंसी सर्विस के अधिकारियों के अनुसार, भीड़ के बीच आतिशबाजी करना और अग्निशमन उपकरण न रखना गंभीर लापरवाही है। वहीं, पुलिस का कहना है कि बिना अनुमति डीजे-आतिशबाजी और सड़क बाधित करने पर कार्रवाई का प्रावधान है।
- आरके सिंह, अधिवक्ता
रात में खतरनाक स्तर पर एक्यूआई
मौसम में लगातार नमी बनी हुई है, जिससे प्रदूषक की एक सतह बन जा रही है। इससे एयर क्वालिटी इंडेक्स लगातार बढ़ रहा है। पिछले एक हफ्ते की रातों में एक्यूआई लगातार खतरनाक स्तर पर रहा। 14 फरवरी को 125, 15 फरवरी 138, 16 फरवरी 145, 17 फरवरी 160, 18 फरवरी 172, 19 फरवरी 180 और 20 फरवरी को 190 दर्ज किया गया, जो सभी अस्वस्थ श्रेणी में आते हैं और बुजुर्ग, बच्चे, अस्थमा और हृदय रोगियों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करते हैं।
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डीजे-आतिशबाजी कॉम्बिनेशन के खतरे
- पीएम2.5/पीएम-10 बढ़ने से एक्यूआई में उछाल
- 90 डेसिबल से ज्यादा ध्वनि प्रदूषण
- भीड़ और बिजली तारों के पास आग का जोखिम
- ट्रैफिक जाम, इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित
- बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों पर गंभीर असर
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