सिद्धार्थनगर। जटिल मौत की गुत्थियों को सुलझाने में जिले की पुलिस विफल है। बीते डेढ़ वर्ष में जिले के चार थाना क्षेत्रों में चार महिलाओं के शव बरामद हुए। शव देखने से साफ जाहिर था कि हत्या कर शव फेंका गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि हुई है, मगर पुलिस अब तक न तो किसी शव की शिनाख्त कर पाई है और न ही हत्या का कारण ढूंढ पाई है। पोस्टमार्टम में मृतकों की उम्र 28 से 40 वर्ष तक आंकी गई थी। मौके से कपड़े और अन्य सुबूत भी मिले, बाजवूद शिनाख्त न होने की दलील देकर पुलिस केस डायरी बंद कर मौन साध गई।
लावारिस हाल में मिले शवों की पहचान में जिले की पुलिस दिलचस्पी नहीं दिखा रही। शव मिलने के बाद पुलिस तीन से चार दिनों तक हाथ-पांव मारती है। इसके बाद मामले को ठंडे बस्ते में डालकर बैठ जाती है। महिला शव के मामले में पुलिस की उदासीनता कुछ ज्यादा ही है। पुलिस रिकार्ड पर गौर करें तो बीते डेढ़ वर्ष मेें चार महिलाओं की विभिन्न थाना क्षेत्रों में लाश पाई गई। तीन हत्याएं क्रूरता पूर्वक की गई थी।
हत्या के बाद लाश को बोरे में भरकर पानी में फेंका गया था। वहीं, एक महिला को जिंदा जलाया गया था। घटना स्थल पर मिले तथ्य भी बेरहमी पूर्वक हत्या की गवाही देते रहे। मगर हत्या का खुलासा करने की बात कौन करे, पुलिस तो यह भी नहीं पता कर सकी कि महिला कहां की है। पुलिस के शिथिल रवैए के कारण लंबित मामलों की संख्या बढ़ रही है। इस संबंध में एएसपी मुन्ना लाल सिंह ने बताया कि हाल ही में कार्यभार संभाला है। यह मामले मेरे संज्ञान में नहीं है। पता कराते हैं। कोई प्रकरण अनट्रेस है तो उसका निस्तारण शीघ्र कराने का प्रयास होगा।