सिद्धार्थनगर। दिनभर काम का बोझ और शाम को घर जाने के बाद एक अलग तरह का खौफ। जिस छत के नीचे रात गुजारनी है, वह सुबह तक सही-सलामत रहेगी या नहीं। बर्डपुर ब्लाक के कर्मचारी ऐसे ही दहशत के बीच जी रहे हैं। ब्लाक परिसर में कर्मचारियों के लिए वर्षों पहले बने आवास जर्जर हो चुके हैं। सीलिंग जगह-जगह क्षतिग्रस्त है। दरवाजे-खिड़कियां उखड़ रहर हैं। फर्श और दीवारों के दम तोड़ने से उनमें रहना कर्मचारियों के लिए खतरे का सबब बना हुआ है।
70 के दशक में बर्डपुर ब्लाक की स्थापना के साथ ही परिसर में पश्चिम छोर पर आठ कर्मचारी आवासों का निर्माण किया गया था। मंशा था कि कर्मचारी ब्लाक मुख्यालय पर बने आवासों में रहेंगे तो कामकाज सुगमता से हो सकेगा। निर्माण के दशकों बाद मरम्मत और देख-रेख के अभाव में आवास जर्जर हो चुके हैं। देखने में खंडहर जैसे प्रतीत होते इन आवासों में रहना जोखिम भरा है, बावजूद कोई अन्य विकल्प न होने से कर्मचारी मजबूर हैं।
दिन भर ब्लाक कार्यालय में दिमाग खपाने के बाद रात में चैन की नींद के लिए आवास पर पहुंचने वाले कर्मचारियों के मन में हर समय भय बना रहता है कि कहीं आवास धराशाई ना हो जाए। हल्की सी बरसात में ही छत टपकने लगती है। पूरा परिसर पानी से भर जाता है। ऐसे समय में आवासों से निकलना भी दुश्वार रहता है। आवास में रह रहीं ग्राम पंचायत अधिकारी गायत्री देवी, गोपेश्वर पटेल, रामनरायण झा, ग्राम विकास अधिकारी विजय मिश्र, अनिल मिश्र, उमेश पटेल, द्वारिका पांडेय, रामदौड़ सिंह, चंद्रभूषण तिवारी का कहना है कि जर्जर आवासों के कारण बराबर खतरा बना रहता है।
कई बार इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन आवासों की मरम्मत व पुनर्निर्माण की कोई पहल नहीं की जा रही। ब्लाक कर्मचारियों का कहना है कि आवास पूरी तरह से जर्जर हो गया है, इसको ध्वस्तीकरण कराकर पुन: नया आवास बनाया जाए। इस संबंध में प्रभारी बीडीओ/जिला विकास अधिकारी सुदामा प्रसाद का कहना है कि आवासों की स्थिति के बारे में रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। दोबारा रिमाइंडर कर इनके मरम्मत व निर्माण के लिए प्रयास कराया जाएगा।