सिद्धार्थनगर। खेत वही हैं, फसल वही है और मेहनत भी पहले जैसी ही है, लेकिन खेती का खर्च अब किसानों की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। धान रोपाई के मौसम में बढ़े डीजल दामों ने खेती का पूरा गणित बिगाड़ दिया है। जोताई, सिंचाई, कटाई और ढुलाई तक हर चरण महंगा हो चुका है।
ऐसे में जिले में छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा दबाव में हैं। कई किसानों ने सिंचाई घटाई, उधार बढ़ाया और खेती का रकबा तक कम करना शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि खेती की कुल लागत कई मामलों में डेढ़ गुना तक पहुंच गई जबकि धान, गेहूं और गन्ने की कीमत उसी अनुपात में नहीं बढ़ सकी।
जिले के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 2,895 वर्ग किलोमीटर में से लगभग 2.42 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। इसमें से विभिन्न खरीफ फसलों (मुख्य रूप से धान) का लगभग 1.5 लाख हेक्टेयर में खेती होती है। बड़ी संख्या में किसान अभी भी डीजल पंप आधारित सिंचाई पर निर्भर हैं। ऐसे में डीजल महंगा होने का सीधा असर खेती पर पड़ रहा है।
प्रगतिशील किसानों के मुताबिक पांच साल पहले रोटावेटर से जहां एक एकड़ खेत की जुताई 1500 से 1800 रुपये में हो जाती थी, वहीं अब 2800 से 3000 रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है। रोटावेटर, पलेवा और खेत समतलीकरण का किराया भी बढ़ चुका है। बर्डपुर के किसान रघुनंदन कहते हैं कि एक सीजन में सिंचाई पर पहले के मुकाबले हजारों रुपये अधिक खर्च हो रहे हैं।
लोटन क्षेत्र के धंधरा निवासी तेज प्रताप सिंह ने कहा कि यह समय खेती का है, लेकिन डीजल के बढ़ते दामों ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उन्होंने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है जबकि पैदावार के हिसाब से किसानों को उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि डीजल महंगा होने से केवल खेती ही नहीं बल्कि घर-गृहस्थी से जुड़े सामानों की कीमतें भी बढ़ेंगी, जिससे किसानों पर दोहरा बोझ पड़ेगा। महदेवा बाजार प्रतिनिधि के अनुसार तहसील नौगढ़ के अंतर्गत ग्राम सेमरा, गदहमरवा, रमवापुर, मोतीपुर आदि गांवों में किसानों को खेत की जुताई के लिए अब पहले से अधिक भुगतान करना पड़ रहा है। किसानों के अनुसार जुताई की दरों में लगभग 100 रुपये प्रति बीघा तक की बढ़ोतरी हुई है, जिससे कृषि लागत बढ़ गई है।
किसान उमेश यादव ने बताया कि पिछले वर्ष रोटावेटर से जुताई 600 रुपये प्रति बीघा और कल्टीवेटर से 300 रुपये प्रति बीघा थी, जो अब बढ़कर क्रमशः 700 रुपये और 400 रुपये प्रति बीघा हो गई है। किसान अफसार ने बताया कि महंगी दरों के बावजूद समय पर जुताई नहीं हो पा रही है, जिससे खेती का काम प्रभावित हो रहा है। वहीं, ट्रैक्टर चालक मेराज ने कहा कि डीजल महंगा होने के कारण प्रति बीघा करीब 100 रुपये की बढ़ोतरी करनी पड़ रही है।