जिला कुष्ठ निवारण अधिकारी(डीएलओ) का मेडिकल अवकाश कुष्ठ रोगियों के लिए भारी पड़ रहा है। डीएलओ की अनुपस्थिति से मासिक पेंशन योजना के लिए जिले में अब तक कुष्ठ रोगियों का चयन नहीं हो पाया है। सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल योजना के बदतर हाल ने अफसर और विभाग दोनों को परेशानी में डाल दिया है। मगर किसी अन्य के पास चार्ज न होने से पात्रता चयन की प्रक्रिया जस की तस अटकी हुई है।
कुष्ठ रोगियों को जीवन निर्वाह के लिए आत्मनिर्भर बनाने के मकसद से प्रदेश सरकार ने इसी वित्तीय सत्र से मासिक पेंशन योजना लागू की है।
एक अप्रैल को इसका नोटिफिकेशन जारी कर तत्काल चयन की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया था। योजना का संचालन विकलांग कल्याण विभाग के माध्यम से होना है, मगर इसमें चयन की प्रक्रिया में स्वास्थ्य विभाग का अहम रोल है। जिला कुष्ठ निवारण अधिकारी के प्रमाणपत्र के आधार पर ही यह तय होगा कि किसे विकलांगता की श्रेणी में रखकर मासिक पेंशन दी जाए।
कायदे से पात्रों का चयन करीब एक से डेढ़ माह पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था, मगर जिले में चयन के नाम पर अब तक सिर्फ ऐसे 217 लोगों की सूची ही बन पाई है, जिन्हें कुष्ठ रोग की दवा दी जा रही है। इस सूची में से ऐसे लोगों का चयन किया जाना है, जो कुष्ठ के कारण विकलांगता की श्रेणी में आ चुके हैं।
चयनित इन्हीं लाभार्थियों को सरकार प्रतिमाह ढाई हजार रुपये पेंशन देगी। बताते हैं कि जांच के बाद प्रमाण पत्र जिला कुष्ठ निवारण अधिकारी को ही जारी करना है, मगर वह लंबे समय से मेडिकल अवकाश पर हैं। किसी अन्य अधिकारी के पास उनका चार्ज भी नहीं है। ऐसे में न तो जांच हो पा रही है और न ही प्रमाण पत्र जारी हो पा रहे हैं। चयन के अभाव में पेंशन योजना जहां की तहां अटकी पड़ी है। इस संबंध में सीएमआे डॉ. अनीता सिंह ने बताया कि डीएलओ मेडिकल अवकाश पर हैं। अपना चार्ज उन्होंने किसी को दिया नहीं है।
ऐसे में किसी अन्य अधिकारी को नामित भी नहीं कर सकते। विभागीय उच्चाधिकारियों से दिशा-निर्देश मांगे गए हैं। शीघ्र ही समाधान निकाल लिया जाएगा।