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जर्जर तार से मौत का खतरा

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जर्जर तार से जा रही ‘जान’
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फोटो-
दो माह में 10 लोगों की करंट की चपेट में आने से हो चुकी है मौत
कहीं लापरवाही तो कहीं जानकारी के अभाव में हुई मौतें
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। बिजली की सुविधा लोगों के लिए जानलेवा भी साबित हो रही है। कहीं जर्जर तार तो कहीं जानकारी का अभाव लोगों के जान पर आफत बन रहा है। दो माह में करंट की चपेट में आकर 10 लोगों की मौत और दो दर्जन से अधिक लोगों का झुलसना इस बात का तस्दीक कर रहा है कि लापरवाही और जर्जर तार लोगों पर मौत बनकर झूल रहे हैं। हादसों का यह दौर कब कम होगा और जर्जर तारों कब बदलें जाएंगे। यह जिम्मेदारों को भी नहीं पता है। हां इतना जरूर है कि जिम्मेदार घटना घटित होने पर खुद को बचाने के लिए पूरा जोर लगा देते हैं। नगरा फीडर में हुआ हादसा इस बात का गवाह भी है। इसके बाद भी व्यवस्था सुधर नहीं रही है। बिजली निगम के अधीक्षण अभियंता एके श्रीवास्तव ने बताया कि मेन लाइन के जर्जर तारों को समय-समय पर बदला जाता है। जहां से जर्जर तार के संबंध में शिकायत मिलती है, वहां पर तार बदलवाया जाता है।
केस एक
शट डाउन लेकर चढ़ा, फिर भी गई जान
मई माह में जोगिया कोतवाली क्षेत्र के कटया दुबे गांव निवासी 45 वर्षीय कमलेश यादव की उस वक्त करंट लगने से मौत हो गई। जब वह नगरा फीडर से जुड़े नगरा गांव में शट डाउन लेेकर बिजली का फाल्ट देखने के लिए बिजली के पोल पर चढ़ा था। मामले में जब केस दर्ज हुुआ तो निगम ने दो दिनों तक बिजली आपूर्ति बंद कर दी।
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केस दो
बिजली की चपेट में आने से हो गई मौत
17 जून को त्रिलोकपुर थाने के मनिकौरा गांव निवासी रामगोपाल यादव (33) बिजली के खंभे पर चढ़कर बिजली दुरुस्त कर रहा था तभी बिजली आने से उसकी मौत हो गई। वह बिजली मिस्त्री का काम करता था। मौत के बाद न तो परिजनों को मुआवजा मिला न ही कोई सुविधा।
केस तीन
लापरवाही से चली गई जान
20 जून को शोहरतगढ़ थाने के लुचुइयां गांव के रहने वाले मो. यूनुस (43) नाई का काम करता था। गांव में एक शादी में सजावट के लिए लगे बिजली के झालर के जर्जर तार के संपर्क में आ गया। मौके पर ही उसकी मौत हो गई। जरा सी लापरवाही से जान चली गई।
केस चार
जागरूकता के अभाव में चली गई जान
24 जून को पथरा थाने के पिपरा रामलाल गांव की साफिया (17) पुत्री आबिद अली घर में सफाई के दौरान पंखे को हटाते समय करंट की चपेट में आ गई और उसकी मौत हो गई। मामले में जागरूकता के अभाव में साफिया की जान गई।
केस पांच
24 जून को बांसी कोतवाली के गोनहा ताल चौराहा निवासी आशा कार्यकर्ता बेचना देवी (55) पत्नी उमाशंकर की नल में करंट उतरने से मौत हो गई थी। बताया जाता है कि परिजनों ने अगर ध्यान दिया होता तो बेचना की जान नहीं जाती।
केस छह
25 जून गोल्हौरा थाने के खखरा खखरी गांव में लालबहादुर चौधरी (45) बिजली के बोर्डं में स्विच ऑन करते वक्त करंट की चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई। परिजनों को बचाने तक का मौका नहीं मिला।
केस सात
30 जून को शोहरतगढ़ क्षेत्र के सिरसिया मिश्र के मदरहिया टोले के रहने वाले दुर्गा प्रसाद (55) वर्ष की मौत बहू लक्ष्मी (25) को करंट से बचाते समय हो गई थी। बताया जाता है कि तार कटा हुआ था। इसकी वजह से हादसा हुआ है।
कई मामले हो जाते हैं रफा-दफा
यह वे आंकड़े हैं, जो कागजों में दर्ज हुए और पुलिस ने जांच की। कई ऐसे भी मामले हैं जो पुलिस तक पहुंचने से पहले ही रफा-दफा कर दिए जाते हैं। अगर उन मामलों को जोड़ दिया जाए तो यह संख्या और भी बढ़ जाएगी।
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बोले इलेक्ट्रीशियन, बरतें सावधानी
बजली का काम करने वाले सुनील ने बताया कि बिजली के जो भी उपकरण घर में लगवाएं वह अच्छी क्वालिटी का होना चाहिए। घर में जब भी फाल्ट हो तो बिजली आपूर्ति बंद करने के बाद ही तार को देखें। पानी वाले मोटर का तार समय-समय पर चेक करते रहे। बोर्ड में पलग लगाने से पहले स्वीच को ऑफ कर दें। पंखे को चलाते समय उसके तार को जरुर देंखे। अगर तार कटा होता तो उसे बदलने के बद ही फैन को चलाएं। साथ ही अगर तार जर्जर हो तो उसे बदल दें। इन सावधानियों को बरतने से हादसा होने की संभावना न के बराबर हो जाती है।
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