पकड़ी बाजार। क्षेत्र के छोटकी धनगढि़या गांव में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शुक्रवार की रात कथावाचक गणेश पांडेय ने ध्रुव चरित्र की कथा सुनाई। कथा सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथावाचक ने बताया कि राजा उत्तानपाद की दो पत्नियां सुनीति और सुरुचि थीं। ध्रुव, सुनीति के पुत्र थे। एक दिन जब पांच वर्षीय ध्रुव अपने पिता की गोद में बैठने लगे तो उनकी सौतेली माता सुरुचि ने उन्हें धक्का देकर हटा दिया और कहा कि राजा की गोद तथा सिंहासन पर बैठने का अधिकार केवल मेरे पुत्र उत्तम को है।
इस अपमान से आहत होकर ध्रुव रोते हुए अपनी माता सुनीति के पास पहुंचे। माता ने उन्हें समझाया कि केवल भगवान ही उन्हें ऐसा स्थान दिला सकते हैं, जहां से कोई उन्हें हटा न सके। माता की बात मानकर बालक ध्रुव जंगल की ओर निकल पड़े, जहां उनकी मुलाकात देवर्षि नारद से हुई। नारद ने उन्हें ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र की दीक्षा दी।
इसके बाद ध्रुव ने यमुना तट स्थित मधुवन में कठोर तपस्या की। उन्होंने केवल हवा और पत्तों के सहारे छह माह तक घोर तप कर भगवान विष्णु को प्रसन्न किया। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे रहे।