सकारपार। बांसी ब्लॉक क्षेत्र के कदमहवा गांव के टोला सेमरा चौराहा पर नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के आठवें दिन बृहस्पतिवार रात में कथावाचक सौरभ कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह की कथा सुनाई। श्रीकृष्ण रुक्मिणी का वेश धारण किए बाल कलाकारों पर भारी संख्या में आए श्रद्धालुओं ने पुष्प की वर्षा की। महिलाओं ने विवाह के मंगल गीत भी गाए। साथ ही मुख्य यजमान दयाराम मौर्य ने दीप प्रज्वलित कर अपने परिवार सहित श्रीकृष्ण रुक्मिणी की आरती उतारी ।
कथावाचक ने कहा कि रुक्मिणी विदर्भ देश के राजा भीष्म की पुत्री और साक्षात लक्ष्मी की अवतार थीं। रुक्मिणी ने जब देवर्षि नारद के मुख से श्रीकृष्ण के रूप, सौंदर्य एवं गुणों की प्रशंसा सुनी तो उसने मन ही मन श्रीकृष्ण से विवाह करने का निश्चय किया। रुक्मिणी का बड़ा भाई रुक्मी श्रीकृष्ण से शत्रुता रखता था। वह अपनी बहन का विवाह चेदिनरेश राजा दमघोष के पुत्र शिशुपाल से करना चाहता था। रुक्मिणी को जब इस बात का पता चला तो उसने एक ब्रह्मांड संदेशवाहक द्वारा श्रीकृष्ण के पास अपना परिणय संदेश भिजवाया। उसके बाद श्रीकृष्ण विदर्भ देश की नगरी कुंडीनपुर पहुंचे। वहा बारात लेकर गए। शिशुपाल व उसके मित्र राजाओं शाल्व, जरासंध, दन्तवक्त्र, विदुरथ और पौंडरक को युद्ध में परास्त करके रुक्मिणी का उसकी इच्छा अनुसार हरण कर लाए। वे द्वारिकापुरी आ ही रहे थे कि उनका मार्ग रुक्मिणी के भाई रुक्मी ने रोक लिया और श्रीकृष्ण को युद्ध के लिए ललकारने लगा। तब युद्ध में श्रीकृष्ण और बलराम ने रुक्मी को पराजित करके दंडित किया। तत्पश्चात श्रीकृष्ण ने द्वारिका में अपने सगे - संबंधियों के समक्ष रुक्मिणी से विवाह किया। भागवत कथा के दौरान बसंत मौर्य, सुरेंद्र नाथ, अष्टभुजा उपाध्याय, नितिन मौर्य, अनुज कुमार सिंह, ध्रुव कुमार, धर्मेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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