विकास के लिए 17 करोड़ लेकिन खर्च फूटी कौड़ी नहीं
जिला पंचायत में सत्ता परिवर्तन के बाद से नहीं हुआ एक भी काम
जिला पंचायत चुनाव के लिए एक साल से भी कम समय बचा है
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। जिला पंचायत में विकास कार्यों के लिए 17 करोड़ रुपये की धनराशि पिछले डेढ़ साल से पड़ी है। लेकिन उसमें से एक फूटी कौड़ी खर्च नहीं हो सकी है। सत्ता परिवर्तन के बाद से ही यह माना जा रहा है कि यहां भी जिला पंचायत अध्यक्ष बदले जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। हां इतना जरूर हुआ है कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से न कोई काम हुए हैं और न ही टेंडर। ऐसे में जिला पंचायत सदस्यों के सामने अब यह सवाल खड़े हो गए हैं कि वह अपने क्षेत्रों में जनता को जवाब क्या दें।
सपा सरकार में जिला पंचायत अध्यक्ष के तौर पर सपा नेता चिन्कू यादव के करीबी गरीब दास निर्वाचित हुए। लेकिन जैसे ही प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और योगी की सरकार बनी। वैसे ही जिला पंचायत में राजनीति शुरू हो गई। कई दिग्गज भाजपा नेता अध्यक्ष पद पर काबिज होने के लिए दौड़ भाग करते रहे। लेकिन सीट आरक्षित होने की वजह से किसी की दाल नहीं गली। ऐसे में शोहरतगढ़ के अपना दल एस के विधायक चौधरी अमर सिंह ने जिला पंचायत में हुए कार्यों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की। जांच में आरोप सही भी पाए गए जिसकी रिपोर्ट तत्कालीन डीएम कुणाल सिल्कू शासन को भेजी थी। लेकिन इस बीच मामला कोर्ट में चला गया और फिर से जांच के आदेश डीएम को दिए गए।
डीएम ने गोपनीय रिपोर्ट शासन को भेज भी दी है। लेकिन इस बीच वित्तीय वर्ष 2018-19 में कोई काम जिला पंचायत में नहीं हो सका। जबकि 17 करोड़ रुपये एक साल से पड़े हैं। साथ ही शासन से करीब 20 करोड़ रुपये और अवमुक्त होने वाले हैं। अपर मुख्य अधिकारी हरिओम चंद्र ने बताया कि इसी साल फरवरी में निकला टेंडर निरस्त हो गया था। अब नए सिरे से टेंडर निकलवाया जाएगा। विकास कार्य किसी भी कीमत पर बाधित होने नहीं दिया जाएगा।
जनता को क्या बताएं समझ में नहीं आता
जिला पंचायत सदस्य अजय सिंह ने कहा कि पिछले दो साल से क्षेत्र में कोई काम करा नहीं सका हूं। स्टीमेट बनवाकर फरवरी में जिला पंचायत को दिया था। लेकिन अब तक कोई काम नहीं हुए। ऐसे में जनता अब सवाल करती है कि आखिर काम क्यों नहीं हो रहे हैं। बताया कि सड़कों का निर्माण से लेकर नाली आदि तक गांव में नहीं बन पा रहे हैं। जबकि चुनाव में एक साल ही शेष है।
फरवरी में हुए थे टेंडर
इसी साल फरवरी में 17 करोड़ रुपये के टेंडर हुए थे। टेंडर निकलने के बाद से ही जिला पंचायत विवादों में आ गया था। इस पर कई जिला पंचायत सदस्यों ने अंगुली उठाई थी, जिस पर डीएम ने टेंडर निरस्त करते हुए नए सिरे से टेंडर कराने का निर्देश दिया था, जो अब तक नहीं हो सके हैं।