- लाखों से बना भवन बना गोदाम, बरसात में नाव और चारपाई से सड़क तक पहुंचती हैं महिलाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
औराताल। तहसील क्षेत्र के महोखवा गांव में लाखों रुपये की लागत से बना प्रसव केंद्र आज बदहाली का शिकार है। हाल यह है कि भवन में प्रसव सुविधाएं तो दूर अंदर भूसा भरा हुआ है। मजबूरन गर्भवतियों को प्रसव के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। करीब 10 वर्ष पूर्व नदी किनारे बसे दर्जनों गांवों की सुविधा के लिए महोखवा में प्रसव केंद्र का निर्माण कराया गया था, ताकि स्थानीय महिलाओं को दूर-दराज न जाना पड़े लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि भवन का उपयोग स्वास्थ्य सेवा के बजाय भंडारण के रूप में हो रहा है।
महोखवा, बनगाई, सुकरौली, कोहलवा और सिर मझारी गांव बरसात के चार महीने अक्सर पानी से घिरे रहते हैं। ऐसे में गर्भवतियों को चारपाई या नाव के सहारे सड़क तक लाना पड़ता है, जहां से उन्हें अस्पताल पहुंचाया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि महोखवा स्थित प्रसव केंद्र में समुचित व्यवस्था होती, तो इस जोखिम से बचा जा सकता था।
ग्रामीणों के अनुसार न तो ग्राम प्रधान ने कभी भवन की सुध ली और न ही संबंधित विभाग ने। इस संबंध में ग्राम प्रधान से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ।
वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेंवा के प्रभारी विकास चौधरी ने कहा कि वह मौके पर जाकर स्थिति की जांच करेंगे। उन्होंने बताया कि पहले यह स्पष्ट किया जाएगा कि भवन किस विभाग का है और निर्माण के बाद स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित किया गया था या नहीं। यदि किसी ने प्रसव केंद्र में भूसा भर रखा है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।